
हम बच्चों से बहुत कुछ कहते हैं—
सच बोलो,
धैर्य रखो,
सम्मान करो,
मोबाइल कम चलाओ,
क्रोध मत करो।
हम उन्हें आदर्श सौंपते हैं।
पर बच्चे
आदर्श नहीं देखते,
वे जीवन देखते हैं।
आदर्श: जो बोला जाता है
आदर्श शब्दों में होते हैं—
पोस्टरों पर,
पाठ्य‑पुस्तकों में,
और बड़ों की सलाहों में।
आदर्श ऊँचे होते हैं,
सुंदर होते हैं,
पर अक्सर
दूर होते हैं।
बच्चा उन्हें सुनता है,
पर उनसे
जुड़ नहीं पाता।
जीवित उदाहरण: जो जिया जाता है
बच्चा देखता है—
आप थककर कैसे बोलते हैं
आप असहमति में कैसे सुनते हैं
आप गलती पर कैसे स्वीकार करते हैं
आप दुख में कैसे चुप रहते हैं
वह आपके शब्दों से नहीं,
आपकी स्थिति से सीखता है।
गीता इसे बहुत सरलता से कहती है—
यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः
(गीता 3.21)
श्रेष्ठ जैसा आचरण करता है,
अन्य लोग वैसा ही सीखते हैं।
यह श्लोक
उपदेश नहीं,
जिम्मेदारी है।
आदर्श का बोझ
जब हम केवल आदर्श बनते हैं—
बच्चा डरता है
वह गलती छुपाता है
वह अपनी कमजोरी छुपाना सीखता है
क्योंकि
आदर्श कभी टूटते नहीं,
और बच्चा
टूटता हुआ
खुद को गलत समझ लेता है।
जीवित उदाहरण की ईमानदारी
जीवित उदाहरण बनने का अर्थ है—
“मुझसे गलती हो गई” कहना
थकान स्वीकार करना
रोने से न डरना
माफी माँगना
जब बच्चा यह देखता है,
तो वह सीखता है—
मनुष्य होना ठीक है।
गीता यहाँ भी मौन से सिखाती है—
उद्धरेदात्मनाऽत्मानं
(गीता 6.5)
अपने आप को
अपने आप से उठाओ।
बच्चा यह तभी सीखता है
जब वह आपको
अपने आप से जूझते हुए
देखता है।
आदर्श दूरी बनाते हैं, उदाहरण जोड़ते हैं
आदर्श कहते हैं—
“ऐसा बनो।”
जीवित उदाहरण कहते हैं—
“चलो, साथ सीखते हैं।”
बच्चों को
पूर्ण माता‑पिता नहीं चाहिए,
उन्हें सच्चे माता‑पिता चाहिए।
भक्ति: बच्चों के सामने
भक्ति बच्चों के लिए
मंत्र नहीं होती—
वह व्यवहार होती है।
जब बच्चा देखता है—
आप चुपचाप किसी को माफ़ करते हैं
आप अहंकार छोड़ते हैं
आप हार के बाद भी कड़वे नहीं होते
तब वह ईश्वर को
शब्दों में नहीं,
जीवन में पहचानता है।
मत्तः स्मृतिर्ज्ञानमपोहनं च
(गीता 15.15)
स्मृति और विवेक
व्यवहार से जन्म लेते हैं।
समापन
बच्चों के लिए
आदर्श होना आसान है—
बस कहना पड़ता है।
पर बच्चों के लिए
जीवित उदाहरण होना कठिन है—
क्योंकि उसमें
खुद को देखना पड़ता है।
पर याद रखिए—
बच्चे वही नहीं बनते
जो आप सिखाते हैं,
वे वही बनते हैं
जो आप जीते हैं।
और शायद
यही सबसे बड़ी साधना है।
हरे कृष्ण..
दासानुदास चेदीराज दास
