मुंबई। बॉलीवुड अभिनेत्री सेलिना जेटली के भाई और सेवानिवृत्त मेजर विक्रांत जेटली जो पिछले 14 महीनों से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में हिरासत में हैं, के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने विदेश मंत्रालय (MEA) को आदेश दिया कि विक्रांत का कानूनी पक्ष रखने के लिए एक कानूनी फर्म की नियुक्ति की जाए।
कोर्ट के जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की पीठ ने ‘अल मारी पार्टनर्स’ नामक कानूनी फर्म को दुबई और अबू धाबी में विक्रांत जेटली का प्रतिनिधित्व करने का निर्देश दिया। यह फर्म सेलिना जेटली के वकील राघव काकर द्वारा सुझाई गई थी, जिनकी सहायता एडवोकेट माधव अग्रवाल और सुराधीश वत्स ने की थी। वकील ने अदालत को बताया कि यह कानूनी फर्म विक्रांत का केस पूरी तरह से मुफ्त (प्रो-बोनो) में लड़ेगी।
हालांकि, विदेश मंत्रालय के वकील ने इसका विरोध किया। उनका तर्क था कि विक्रांत जेटली ने दूतावास से कहा था कि कानूनी फर्म की नियुक्ति का निर्णय उनकी पत्नी, चारू जेटली द्वारा लिया जाएगा। इस पर सेलिना जेटली के वकील ने कड़ा विरोध करते हुए कहा कि मंत्रालय तथ्यों को छिपा रहा है। वकील ने यह भी बताया कि विक्रांत अपनी पत्नी से बात भी नहीं करना चाहते। इस पर अदालत ने टिप्पणी की, “जब फर्म बिना किसी खर्च के प्रतिनिधित्व के लिए तैयार है, तो इससे क्या फर्क पड़ता है कि यह नाम पिता, माता या बहन ने सुझाया हो।”
पूरा मामला क्या है?
इससे पहले, 3 नवंबर 2025 को दिल्ली हाई कोर्ट ने विदेश मंत्रालय को आदेश दिया था कि विक्रांत को कानूनी सहायता दी जाए, भाई-बहन के बीच संवाद को सुविधाजनक बनाने के लिए कदम उठाए जाएं, और एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए। इस मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी 2026 को होगी।
