
कंगना ने इसे एक डार्क सैटैनिक कल्ट से जोड़ते हुए कहा कि यह जानकर वह निराशावादी हो गई हैं कि जिन प्रसिद्ध हस्तियों, जैसे रॉकस्टार्स, फिल्म सितारे, पॉलिटिशियन्स और मॉडल्स के बारे में हम जानते हैं, वे असहाय महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों में शामिल थे। इसने उन्हें मानवता और भविष्य के बारे में चिंता करने पर मजबूर कर दिया है।
कंगना ने इस मुद्दे पर भारत की सांस्कृतिक धारा को भी उजागर किया। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति और सनातन धर्म ही वह सही उत्तर है जिसे पूरी दुनिया तलाश रही है। उनका मानना है कि भारत की संस्कृति में जो “सुर” और “असुर” की कहानियां हैं, वे आज भी प्रासंगिक हैं। राक्षसों के होते हुए भी भगवान का उदय होता रहेगा, और यह निरंतर प्रक्रिया चलती रहेगी। कंगना ने यह भी सवाल उठाया कि लोग किस दिशा में हैं—क्या वे असुरों की तरफ हैं, या भगवान के रास्ते पर चलने की कोशिश कर रहे हैं?
कंगना का यह बयान इस बात को रेखांकित करता है कि वह मानती हैं कि दुनिया को सही दिशा दिखाने के लिए भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म की मूल्य प्रणाली की आवश्यकता है, खासकर जब वैश्विक स्तर पर इस तरह के अंधेरे और अमानवीय घटनाएं हो रही हैं।
