संजय राउत ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए उन्हें नरवणे की सुरक्षा को लेकर चिंता है और यह कहना मुश्किल है कि उनके साथ आगे क्या हो सकता है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में बताया कि संसद में राहुल गांधी द्वारा पूर्व आर्मी चीफ का हवाला देकर चीन से जुड़े मुद्दे उठाना और सरकार द्वारा उन्हें रोकना पूरी तरह गलत था। राउत ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला बताते हुए कहा कि इस घटनाक्रम के बाद उन्हें नरवणे की सुरक्षा को लेकर आशंका हो रही है।
राउत ने आरोप लगाया कि जब देश पर संकट आया या पड़ोसी देश सीमा पर हमला करने की तैयारी कर रहा था, तब राजनीतिक नेतृत्व को निर्णय लेना चाहिए था। उन्होंने बताया कि जनरल नरवणे उस समय लगातार आदेश का इंतजार कर रहे थे और चीन के अतिक्रमण का जवाब देने के लिए निर्देश मांग रहे थे, लेकिन नेतृत्व ने पीछे हटना चुना। संजय राउत ने कहा कि अब पूर्व सेना प्रमुख की सुरक्षा बढ़ाई जानी चाहिए, क्योंकि पहले भी ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं जहां अहम मुद्दे उठाने वालों के साथ अप्रिय घटनाएं हुईं। उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का जिक्र करते हुए कहा कि सीमा सुरक्षा और राष्ट्रीय हित के मुद्दे उठाने वालों के साथ क्या हुआ, यह सब चिंता बढ़ाता है।
मंगलवार को लोकसभा में राहुल गांधी ने पूर्व आर्मी चीफ नरवणे की गैर प्रकाशित पुस्तक का हवाला देकर डोकलाम क्षेत्र में चीनी टैंकों की मौजूदगी का जिक्र किया था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आपत्ति जताई और कहा कि अप्रकाशित पुस्तक को संसद में कोट नहीं किया जा सकता।संजय राउत के इस बयान ने राजनीतिक बयानबाजी और राष्ट्रीय सुरक्षा पर बहस को और संवेदनशील बना दिया है।
