श्रीमती ठाकुर ने भारत के व्यापक सामाजिक संरक्षण और समावेशन उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि देश में खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों के तहत 80 करोड़ से अधिक लोगों को लाभ मिल रहा है जो भूख और कुपोषण से लड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है। वहीं स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों के विशाल नेटवर्क के माध्यम से 55 करोड़ से अधिक नागरिकों को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अलावा देशभर में फैले 16000 जन आरोग्य केंद्रों के जरिए किफायती दवाएं और चिकित्सा उपकरण सुनिश्चित किए जा रहे हैं।
उन्होंने लोकतांत्रिक सशक्तिकरण की चर्चा करते हुए बताया कि स्थानीय प्रशासन में 14 लाख से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधि कार्यरत हैं जो जमीनी स्तर पर भारत की लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता और महिला सशक्तिकरण का मजबूत उदाहरण हैं। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और सुकन्या समृद्धि योजना जैसी पहलें बालिकाओं की शिक्षा और आर्थिक सुरक्षा को नई मजबूती दे रही हैं।
श्रम सुधारों का उल्लेख करते हुए श्रीमती ठाकुर ने कहा कि समान वेतन सुरक्षित कार्यस्थल और महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। साथ ही बिना गारंटी वाले ऋणों ने लाखों महिलाओं उद्यमियों और स्ट्रीट वेंडरों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है। स्माइल योजना जैसी लक्षित पहलें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों और अन्य कमजोर वर्गों के पुनर्वास और सामाजिक समावेशन में सहायक सिद्ध हो रही हैं।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत की विकास यात्रा में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण DBT और नागरिक भागीदारी का सफल एकीकरण किया गया है जिससे पारदर्शिता और अंतिम छोर तक लाभ पहुंचाना संभव हुआ है।
अंत में वसुधैव कुटुंबकम की भारतीय सभ्यतागत भावना को दोहराते हुए श्रीमती ठाकुर ने कहा कि भारत वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने और सामाजिक न्याय को आगे बढ़ाने के लिए अपने विकास अनुभव साझा करने को पूरी तरह तैयार है। इस सत्र में संयुक्त राष्ट्र के अधिकांश सदस्य देशों की सक्रिय भागीदारी रही। सत्र के बाद उन्होंने स्वीडन की सामाजिक सेवा मंत्री कैमिला वाल्टरसन ग्रोनवॉल से शिष्टाचार भेंट भी की।
