राष्ट्रीय महासचिव ने राज्यों की इकाई और जिला अध्यक्षों को पत्र लिखकर यह निर्देश दिए हैं। इस गाइडलाइन को एआईसीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में बैठक में तय किया गया था। इसके साथ ही 15 दिन के भीतर जिलों की कार्यकारिणी बनाने का निर्देश भी दिया गया।
मध्य प्रदेश में लंबे समय से जम्बो कार्यकारिणी की परंपरा रही है ताकि अलग-अलग गुटों को संतुलित किया जा सके। लेकिन नई गाइडलाइन आने के बाद कई जिलों में असमंजस्य की स्थिति पैदा हो गई है। 30 जनवरी को मध्य प्रदेश कांग्रेस ने तीन जिलों की कार्यकारिणी जारी की थी, जिसमें गाइडलाइन से ज्यादा पदाधिकारी बना दिए गए।
छिंदवाड़ा जिला कार्यकारिणी में 240 सदस्य बनाए गए हैं जबकि सागर जिले में 150 से ज्यादा पदाधिकारी हैं। छोटे जिले मऊगंज में 40 पदाधिकारी हैं। वहीं भोपाल शहर की सूची में 106 और ग्रामीण क्षेत्र की सूची में 85 सदस्य बनाए गए हैं। नई गाइडलाइन लागू होने के बाद यह लंबी सूची राष्ट्रीय संगठन के निर्देशों के खिलाफ मानी जा रही है और अब कांग्रेस में असमंजस्य की स्थिति बन गई है।सभी जिलों में जल्द ही नए निर्देश के मुताबिक कार्यकारिणी तैयार करने की तैयारी शुरू हो गई है और संगठन स्तर पर इस पर निगरानी रखी जा रही है।
