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“”पानी रे पानी……. हम बूंद-बूंद कूं तरसैगे।””
दूधिया भौर भये पैज्यों, लेउ दूध की टेर लगावत है,
सब्जी-भॉजी को विक्रेता, कुछ अपनी धुन में गावत है।
कछु ऐसौई हाल, होय जलकों, हम बूंद-बूंद कूं तरसैगे।
लै लो पानी ताजा पानी कह गलियन हाकर बेचेंगे।
विक्रेता पानी का जिस दिन, यदि नागा कर जायेगा,,
रूके काम पानी आधारित,चूल्हा भी बिरमायेगा।
फिर पार-परोसिन से घरवाली, छह लौटा पानी मॉगेगी,
कल तक उधार दे दो पानी, यों कह निज काम चलावेगी।
ज्यों पम्प पेट्रोल के चल रहे, पानी के पम्प लगावेंगे,
करि जेब गरम आफीसर की, कोटा-परमिट लेै आवेंंगे।
ओपिन मार्केट में बिकें नीर, विज्ञापन कुछ ऐसे बोलेंगे,
दो बोतल मटमैले की लो, एक शुद्घ साथ में दे देगे।
जब व्योैपार बढ़ेै भारी,मिलावट भी रंग दिखवैगी,
है पानी की रंगत ऐसी, बहुतों के भाग्य जगावेंैगी।
करें मिलावट पानी में, वह भी पानी की ही होगी,
अपमिश्रण विभाग सब देखैगा, उॅंगली पॉचों घी में होगी॥
पानी के बैंक खुलैं जहॉ-तहॉ, पानी सहेज रख जावेगा,
खातेदार बचे पानी को, खाते निज में डलवायेगा।
लोग कहेंगे खाते में मेरे, साठ बाल्टी पानी है,
एक माह का है भोजन,अरू एक माह का पानी है॥
कल-ए-टी-एम लगी होगी, बैंकों में यह सुविधा होगी,
कम्पनी कुछ ऐसी भी होगी, जो फिक्स डिपाजिट युत होगी।
एक बाल्टी पानी की यदि,जमा आज तुम करो भ्रात,
पॉच बाल्टी जल लेना, बीते बस ज्यों ही साल तात।
बे-ईमानी होगी जल में, कोई पानी ले चम्पत होगा,
कीमत बढऩे से पानी की चोरी का अति भय होगा।
्रपानी चोरी तो संसद में, अपराध बड़ा घोषित होगा,
स्नान अवैध घोषित होकर, दो वर्ष सजा हेतु होगा।
समाचार पत्र मोटे अक्षर में, कुछ खबर इस तरह छापेंगे,
थे चार जने जो नहा रहे, दो तो पुलिस पकड़ में है, दो भी पकड़े जावेंगे।
अब नई अमीरी का मापन, पानी से किया जायेगा,
होगा जिस पर पानी अधिक आयकर भी लिया जायेगा।
सोने से प्यास नहीं बुझती, पानी ही प्यास बुझायेगा,
धनी होय या निर्धन हो, सबके हित पानी आता है।
कुछ ऐसाजतन करों भाई यह व्यर्थ न जाये बिल्कुल भी,
ऑखों के पानी सम रखें, नहीं होय विकल कोई जन भी।
डालचंद कुशवाहा
आर.11/ 65 राजनगर
गाजियावाद 201001 उत्तरप्रदेश
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