
नर्मदापुरम 10 फरवरी 2026 (हिन्द संतरी) जिला सहकारी बैंक नर्मदापुरम एवं हरदा की शाखाओं की अधिकांश समितिओं के कर्मचारियों ने करोड़ों रूपये की आर्थिक अनिमितताये कर समितिओं का दीवाला निकाल दिया है किन्तु उपपंजीयक और सयुंक्त पंजीयक के न्यायालयों में प्रचलित सेकड़ों मामलों में सहकारी अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामले निर्णित होने के बाद वसूली कार्यवाही को अंजाम नही दिया जाकर दोषियों को संरक्षण दिया जा रहा है, इस सम्बन्ध में आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित गोचीतरोंदा के समिति प्रबंधक सुरेश साहू के विरुद्ध अंकेक्षण वर्ष 2012-13 में राशि 2 करोड़ 98 लाख 46 हजार 750/- रूपये एवं वर्ष 2014-15 में राशि 583285.89/- की आर्थिक अनियमिततायें की वसूली आदेश का पालन नहीं किया गया और न ही उक्त प्रबंधक साहू पर पुलिस थाने में मामला दर्ज कराया और न ही उसकी सम्पत्ति कुर्क कर समिति में हुए गबन की राशि जमा कराइ गई है,उलटे गबन आर्थिक अनिमितता के लिए दोषी पाए जाने पर निलंबन की सजा को समाप्त कर पुरुस्कार में उसे समिति में बहाली के आदेश जारी किये गए, जो अपने आप में भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का साक्ष्य है।
चूँकि इसके बाद समिति प्रबंधक सुरेश साहू ने उक्त आदेश के खिलाफ सयुंक्त आयुक्त कोर्ट में अपील की थी वह भी निरस्त होने के साथ 2 करोड़ 98 लाख 46 हजार 750 रूपये वसूली का आदेश यथावत रखा गया है। इसी क्रम में उप अंकेक्षक व्दारा संस्था के अंकेक्षण वर्ष 2014-15 के वार्षिक अंकेक्षण के दौरान राशि 583285.89/- की आर्थिक अनियमिततायें पाते हुए धारा 58 बी के अंतर्गत विशेष प्रतिवेदन प्रस्तुत कर अपीलार्थी से राशि रूपये 583285.89/- रूपये की वसूली निरूपित की। तदोपरांत उत्तरवादी व्दारा प्रकरण पंजीबद्ध कर अपीलार्थी के विरूद्ध उक्त राशि की वसूली सयुंक्त आयुक्त के न्यायलय में अपील 31 दिसम्बर 2021 को निरस्त कर वसूली आदेश यथावत रखा गया।
इन दोनों मामलों के चलते आगे के वर्षों में भी उक्त समिति प्रबंधक सुरेश साहू संस्था में पदस्थ रहा और आर्थिक अनियमितताए करता रहा किन्तु घोर आश्चर्य की बात है कि समिति द्वारा आदेश यह सब होने के बाद अपने कार्यालय के कमांक / समिति/01/19-20 दिनांक 21.06. 19 के माध्यम से सुरेश साहू पर अवैधानिक ढंग से आरोप लगाते हुए निलंबित किया तो उक्त सुरेश साहू ने सेवा नियमों का हवाला देकर उसके निलंबन के पश्चात 45 दिन के अंदर उसे आरोप पत्र न देने और अधिकतम 10 दिवस के अंदर आरोप पत्र प्रदत्त नहीं किये जाते है तो सेवा नियम अनुसार निलंबन आदेश स्वमेव ही बहाल माना जाने का पक्ष रखकर आरोप लगाया कि तत्कालीन समिति प्रबंधक भूपेन्द्र दुबे इन आर्थिक गबन के लिए दोषी है, सुरेश साहू के विरुद्ध 3 करोड़ 4 लाख 30 हजार रूपये के लिए दोषी पाने वाले उपपंजीयक शिवम् मिश्रा ने उपविधियों का हवाला देते हुए दिनांक 31.07.2023 को सुरेश साहू का निलंबन समाप्त कर बहाल तो कर दिया किन्तु अपनी ही कोर्ट के उक्त आरोपों से दोषमुक्त किये बिना वसूली की कार्यवाही और पुलिस अपराध दर्ज करने की बजाय क्यों कृपा कर बहाली की, यह यक्ष प्रश्न आज भी खड़ा है और एक महाभ्रष्ट समिति प्रबंधक सुरेश साहू जिला सहकारी बैंक की काजल की कोठरी में दागी होने के बाद भी बेदगी बना, उसपर आरोपित राशि के आदेशों को भी धता बता रहा है।
