पिछले कुछ समय में राष्ट्रपति ट्रंप के शासनकाल के दौरान भारत और अमेरिका के संबंधों में काफी ठंडापन महसूस किया गया था। ट्रंप प्रशासन ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर कड़ी टिप्पणियां की थीं और कई कड़े अमेरिकी टैरिफ भारत पर थोप दिए थे, जिससे आपसी सहयोग पर दबाव बढ़ गया था। लेकिन नई ट्रेड डील के बाद हालात तेजी से बदलते दिख रहे हैं। अमेरिका ने भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत के भारी टैरिफ को घटाकर अब मात्र 18 प्रतिशत कर दिया है, जो भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी राहत है। इसके बदले में भारत ने अगले पांच वर्षों में 500 बिलियन डॉलर के अमेरिकी सामान खरीदने की संभावना जताई है।
अमेरिकी विदेश विभाग में एशियाई मामलों के सहायक सचिव पॉल कपूर ने आधिकारिक पुष्टि की है कि दोनों देश रक्षा संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने अपने बयान में कहा कि अमेरिका और भारत अधिक उन्नत हथियार प्रणालियों की खरीद पर चर्चा कर रहे हैं, जिससे न केवल भारत की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि अमेरिका में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। यह सप्लाई श्रृंखला दोनों देशों के बीच एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदारी को दर्शाती है, जिसमें ऊर्जा उत्पादों से लेकर उच्च तकनीक वाले सैन्य उपकरणों तक सब कुछ शामिल है।
वर्तमान रक्षा परिदृश्य की बात करें तो भारत ने 114 राफेल फाइटर जेट की खरीद को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही अमेरिका के साथ समुद्री निगरानी विमानों और अन्य बड़ी सैन्य प्रणालियों पर गहन चर्चा जारी है। हालांकि, इस सौदे में फिलहाल एफ-35 जैसे पांचवीं पीढ़ी के फाइटर विमानों की खरीद पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन अमेरिका लगातार भारत को अपने रक्षा खेमे में लाने के प्रयास कर रहा है। भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए अपनी जरूरतों के हिसाब से सर्वश्रेष्ठ तकनीक का चयन कर रहा है।
भारत के लिए यह संतुलन बनाना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है, क्योंकि रूस स्वतंत्रता के बाद से ही भारत का सबसे भरोसेमंद साझेदार रहा है। अमेरिका ने कई बार भारत को पूरी तरह अपने पक्ष में करने की कोशिश की है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की स्वायत्तता वाली विदेश नीति ने दोनों देशों के साथ संतुलन बनाए रखा है। इस नई डील के बाद यह साफ हो गया है कि भारत-अमेरिका रिश्तों में एक नया भरोसा पैदा हुआ है। यह समझौता न केवल सैन्य मोर्चे पर बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी भविष्य की सुनहरी तस्वीर पेश करता है, जहाँ दोनों देश मिलकर वैश्विक चुनौतियों का सामना करेंगे।
