वैज्ञानिक दृष्टिकोण से आंखों के ऊपर भौंहों वाला क्षेत्र frontal sinus और trigeminal nerve से जुड़ा होता है। जब नींद पूरी नहीं होती, तो भौंहों के बीच तेज दर्द होता है। इससे मस्तिष्क में सेरोटोनिन और मेलाटोनिन हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे सिर दर्द के साथ-साथ आंखों की मांसपेशियों पर भी दबाव बढ़ता है।
आयुर्वेद में इस स्थिति को शरीर में वात की वृद्धि और नींद की कमी से जोड़ा गया है। वात बढ़ने पर नींद प्रभावित होती है और पूरे तंत्रिका तंत्र में असंतुलन पैदा होता है। इसके चलते सिर में दर्द, आंखों में भारीपन और मानसिक थकान महसूस होती है।
आयुर्वेद में इसके लिए कई सरल और प्रभावकारी उपाय बताए गए हैं। पहला उपाय है नस्य विधि। रात में सोने से पहले नाक में कुछ बूंदें देसी घी की डालने से नाक का रुखापन कम होता है और सांस लेने में आसानी होती है। इससे सिर और आंखों पर दबाव घटता है और नींद भी अच्छी आती है।
दूसरा उपाय है तलवों की मालिश। तलवों पर कई प्रेशर पॉइंट्स मौजूद हैं जो शरीर के संतुलन को बनाए रखते हैं और नींद लाने में मदद करते हैं। दिनभर की थकान और शरीर में जमा टॉक्सिन को बाहर निकालने के लिए रात में तलवों की हल्की मालिश लाभकारी है।
इसके अलावा, सिर दर्द और मानसिक थकान कम करने के लिए ब्राह्मी और जटामांसी का सेवन आयुर्वेद में बहुत प्रभावी माना गया है। ये हर्ब्स मन को शांत करते हैं, नींद में सुधार लाते हैं और मानसिक तनाव कम करते हैं।
आंखों की थकान कम करने के लिए त्रिफला जल से नेत्र प्रक्षालन भी कारगर है। ठंडे जल में त्रिफला पाउडर मिलाकर आंखें धोने से आंखों की मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं और आंखों की रोशनी में सुधार होता है।
रात के समय हल्दी, काली मिर्च और जायफल वाला दूध पीने से भी नींद बेहतर आती है। यह मस्तिष्क को शांत करता है, शरीर में ऊर्जा बनाए रखता है और नींद की गुणवत्ता बढ़ाता है।
इस तरह, आयुर्वेद में सुझाए गए ये उपाय न सिर्फ सिर दर्द और आंखों की थकान को कम करते हैं, बल्कि शरीर और मन दोनों को संतुलित रखते हैं। नियमित रूप से इन विधियों को अपनाकर व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में मानसिक और शारीरिक तनाव को काफी हद तक कम कर सकता है।
