खुली धूप में उतरती श्रीमद् भगवत गीता
यहाँ न माला है, न मंच-भक्ति—यहाँ माइक, लाइट और लाइक हैं।
आज के मोटिवेशन गुरुओं में भिड़ंत
(या जब जीवन को स्लाइड में समेट दिया गया)
आज शहर में दो तरह के गुरु हैं—
एक जो जीवन से गुज़रे हैं,
दूसरे जो जीवन पर प्रेज़ेंटेशन देते हैं।
दुर्भाग्य से भीड़ दूसरे के साथ है।
1. “तुम सब कर सकते हो” वाला गुरु
मंच पर खड़ा गुरु कहता है—
“अगर तुम हार रहे हो, तो तुमने पूरा ज़ोर नहीं लगाया।”
भीड़ तालियाँ बजाती है।
कोई यह नहीं पूछता—
“और जो पूरा ज़ोर लगाकर भी हार गया?”
गीता यहाँ बीच में खड़ी हो जाती है—
न हि कश्चित्क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्
— (गीता 3.5)
कर्म सब कर रहे हैं।
पर परिणाम सबके वश में नहीं।
मोटिवेशन गुरु मेहनत को बेचता है,
पर सीमा को अपराध बना देता है।
2. सक्सेस बनाम शांति
आज का गुरु सफलता को ऐसे पेश करता है
जैसे वह हर आदमी का नैसर्गिक अधिकार हो।
नतीजा?
सफल लोग बेचैन,
असफल लोग अपराधी।
गीता बहुत ठंडी आवाज़ में कहती है—
संतोषः परमं सुखम्
संतोष—
जिसका स्लाइड नहीं बनता,
जिसे कोई सेमिनार नहीं बेच सकता।
3. एक मंच, तीन गुरु
आज के मोटिवेशन बाज़ार में
तीन किस्म के गुरु टकराते हैं—
(1) कॉर्पोरेट गुरु
“टाइम मैनेज करो, माइंड हैक करो, 5 AM क्लब जॉइन करो।”
गीता पूछती है—
कालोऽस्मि
समय तुम्हारा नहीं है।
(2) स्पिरिचुअल गुरु
“सब माया है, बस पॉजिटिव रहो।”
गीता जवाब देती है—
दुःखेष्वनुद्विग्नमनाः
दुख आएगा,
उससे भागो मत—समझो।
(3) हाइब्रिड गुरु
सुबह ध्यान,
दोपहर बिज़नेस,
शाम को मोटिवेशनल रील।
गीता चुप रहती है—
क्योंकि चुप्पी ही यहाँ सबसे बड़ा उत्तर है।
4. गुरु बनाम गुरुजी
पुराना गुरु कहता था—
“तुम अज्ञान में हो।”
आज का गुरुजी कहता है—
“तुम बस अनफोकस्ड हो।”
पहला झकझोरता था,
दूसरा सहलाता है।
गीता गुरुजी नहीं बनती—
तस्मादज्ञानसम्भूतं हृत्स्थं ज्ञानासिनाऽऽत्मनः
— (गीता 4.42)
अज्ञान को काटो,
कवर मत करो।
5. मोटिवेशन की सबसे बड़ी ठगी
मोटिवेशन गुरु कहते हैं—
“नेगेटिविटी छोड़ो।”
गीता पूछती है—
“समझे बिना कैसे?”
काम एष क्रोध एष
— (गीता 3.37)
जब तक कारण नहीं समझोगे,
तब तक क्रोध छोड़कर
सिर्फ थक जाओगे।
6. कृष्ण क्यों मोटिवेशनल स्पीकर नहीं थे?
कृष्ण चाहते तो अर्जुन से कह सकते थे—
“यू आर द बेस्ट वॉरियर।”
उन्होंने ऐसा नहीं कहा।
उन्होंने कहा—
क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ
— (गीता 2.3)
कायरता छोड़ो।
पहले भ्रम तोड़ो,
फिर कर्म की बात।
आज के गुरु उल्टा करते हैं—
पहले आत्मविश्वास,
फिर सत्य (अगर समय मिला तो)।
7. भीड़ क्यों इन्हें पसंद करती है?
क्योंकि—
सत्य कठोर है
मोटिवेशन मीठा
साधना धीमी
तालियाँ तुरंत
गीता लोकप्रिय नहीं,
पर प्रामाणिक है।
8. निष्कर्ष : कौन सा गुरु चुनें?
जो कहे— “तुम सब कुछ कर सकते हो”
उससे सावधान रहिए।
जो कहे—
“तुम सब कुछ नहीं हो,
पर जो हो—वही पर्याप्त है।”
वही गुरु है।
शहरनामा-सा आख़िरी वाक्य
आज के मोटिवेशन गुरुओं की सबसे बड़ी सफलता यह है
कि उन्होंने मन को खुश करना सिखा दिया,
आत्मा को जगाने की कीमत पर।