स्थानीय निवासी नरेंद्र तिवारी ने बताया कि सुबह मॉर्निंग वॉक के दौरान उन्होंने हनुमान मंदिर के पास सड़क किनारे पड़े मेडिकल अपशिष्ट का ढेर देखा। आश्चर्य की बात यह रही कि कई गोवंश इस कचरे के बीच विचरण कर रहे थे और उसे चारे की तरह ग्रहण कर रहे थे, जो उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
रिहायशी इलाके में खुले में मेडिकल कचरा फेंके जाने से संक्रमण फैलने का खतरा लगातार बढ़ रहा है। बुढार नगर में कई निजी क्लिनिक संचालित हैं, जहां से निकलने वाले मेडिकल अपशिष्ट का उचित निस्तारण नहीं किया जाता। नतीजा यह हुआ कि सड़कें डंपिंग ग्राउंड बन गई हैं और पर्यावरण और जनस्वास्थ्य दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
विशेष रूप से, उपयोग किए गए इंजेक्शन, सुइयां और दवाइयों की शीशियां सीधे तौर पर लोगों और मवेशियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही हैं। स्थानीय लोग चिंता जताते हुए प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि जिम्मेदार क्लीनिक संचालकों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
नरेंद्र तिवारी ने कहा कि अगर तत्काल कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोहराई जा सकती हैं। स्थानीय प्रशासन से भी आग्रह किया गया है कि रिहायशी इलाकों में निगरानी बढ़ाई जाए और मेडिकल अपशिष्ट का सही निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। यह मामला न केवल शहडोल बल्कि पूरे प्रदेश के स्वास्थ्य और पर्यावरण प्रबंधन की प्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। ऐसे बायो वेस्ट की अनदेखी से संक्रमण और जानलेवा बीमारियों का खतरा बढ़ता है।
