सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई पार्षद मोहन पचौरी द्वारा की गई शिकायत के आधार पर की गई थी। शिकायत में नगर पालिका परिषद में वित्तीय गड़बड़ियों और अनियमित भुगतान के आरोप लगाए गए थे। इसी शिकायत की जांच के लिए EOW की टीम दस्तावेजों की जांच करने पहुंची थी।
हालांकि टीम के पहुंचने की भनक लगते ही नगर पालिका अध्यक्ष और मुख्य नगर पालिका अधिकारी CMO सहित कई कर्मचारी कार्यालय से निकल गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कुछ ही मिनटों में पूरा दफ्तर खाली हो गया। कर्मचारी अपनी कुर्सियां छोड़कर चले गए और जरूरी फाइलों वाली आलमारियों में ताले जड़ दिए गए जिससे जांच टीम को रिकॉर्ड तक पहुंच नहीं मिल सकी।
करीब चार से पांच घंटे तक EOW की टीम ने कार्यालय में इंतजार किया लेकिन कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी वापस नहीं लौटा। दस्तावेजों की अनुपलब्धता के चलते टीम को बिना किसी जब्ती या औपचारिक कार्रवाई के लौटना पड़ा। हालांकि सूत्रों का कहना है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और आगे समन जारी किए जा सकते हैं।
स्थानीय स्तर पर इस घटना के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। पार्षद मोहन पचौरी का कहना है कि नगर पालिका में लंबे समय से वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें मिल रही थीं और पारदर्शिता के लिए जांच आवश्यक है। वहीं नगर पालिका की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
EOW की यह कार्रवाई भले ही तत्काल दस्तावेजी जांच में सफल नहीं रही हो लेकिन अचानक हुई दबिश और कर्मचारियों के दफ्तर छोड़ने की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच एजेंसी आगे क्या कदम उठाती है और क्या संबंधित अधिकारियों को दोबारा पूछताछ या दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए बुलाया जाएगा।
