फिल्ममेकर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट 71 दिन जेल में रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट से बेल मिलने के बाद शुक्रवार को रिहा हो गए। उदयपुर जेल कैंपस के बाहर मीडिया से बातचीत में विक्रम ने अपने जेल में बिताए समय और फ्रॉड केस पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि वह पॉजिटिव हैं और उन्हें भारतीय लीगल सिस्टम पर पूरा भरोसा है।
जेल में बिताए 71 दिन
विक्रम भट्ट को दिसंबर 2025 में मुंबई से राजस्थान पुलिस ने ₹30 करोड़ के फ्रॉड केस में गिरफ्तार किया था। इस केस में उन्हें और उनकी पत्नी को आरोपी बनाया गया था। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा बेल दिए जाने के बाद दोनों को उदयपुर जेल से रिहा किया गया।
जेल से बाहर आते ही विक्रम ने कहा, “मैंने ढाई महीने जेल में बिताए हैं। मुझे पूरा भरोसा था कि सच सामने आएगा। जेल में मेरा एक दोस्त बना जिसने मुझे मेवाड़ की मिट्टी के स्वभाव के बारे में बताया। उसने कहा कि मेवाड़ की मिट्टी में सच परेशान हो सकता है, लेकिन हार नहीं सकता। मैं उसी मिट्टी का तिलक लगाकर बाहर जा रहा हूं, यहाँ सच की हमेशा जीत होगी।”
विक्रम ने जेल अनुभव को आध्यात्मिक नजरिए से भी देखा। उन्होंने कहा, “मैं भगवान कृष्ण का भक्त हूं। मैं उसी जगह पर रहा हूँ जहाँ भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। मैं पहले से दोगुना बेहतर बनकर बाहर आ रहा हूं। भगवान कृष्ण की तरह मुझे भी नई लड़ाई लड़नी है। मुझे इस देश के लीगल सिस्टम पर पूरा भरोसा है और जो भी न्याय होगा, वह सबके हित में होगा।”
फ्रॉड केस की पृष्ठभूमि
विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी पर नवंबर 2025 में उदयपुर में एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायत करने वाले डॉ. अजय मुर्डिया ने आरोप लगाया कि भट्ट दंपति ने एक फिल्म प्रोजेक्ट के नाम पर ₹30 करोड़ से अधिक की राशि हड़प ली। शिकायत में कहा गया कि प्रोडक्शन हाउस ने चार फिल्मों के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइन किए, लेकिन एग्रीमेंट के मुताबिक फिल्में प्रदान नहीं कीं और फंड का गलत इस्तेमाल किया।
पुलिस ने अपनी जांच में यह पाया कि आरोपियों ने नकली बिल और दस्तावेज़ का इस्तेमाल कर पैसे निकालने की कोशिश की। हालांकि, विक्रम भट्ट ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है और कहा कि वे पूरी तरह निर्दोष हैं।
अगले कदम और मीडिया प्रतिक्रिया
जेल से रिहाई के बाद विक्रम ने मीडिया से कहा कि वे फिलहाल अपने फिल्म और प्रोडक्शन काम पर ध्यान केंद्रित करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि जेल का अनुभव उनके लिए सीख और आत्मनिरीक्षण का अवसर रहा। उनका कहना था कि मुश्किलें चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हों, सच और न्याय हमेशा जीतते हैं।
विक्रम भट्ट की यह कहानी न केवल फिल्म उद्योग में विवाद और कानूनी लड़ाई की मिसाल है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कठिनाइयों के बीच भी धैर्य और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है।
