आधिकारिक जानकारी के अनुसार कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने बताया कि विगत दिनों मौसम परिवर्तन और अनियमित वर्षा के कारण फसलों को हुई क्षति की सूचनाओं को संज्ञान में लेते हुए क्षेत्र में नुकसान का आंकलन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में कृषि अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है, ताकि हर प्रभावित किसान तक सही जानकारी और मदद पहुंच सके।
कलेक्टर ने बताया कि फसल नुकसान की समीक्षा के लिए जिले में विशेष टीमों का गठन किया गया है, जो खेतों का दौरा कर वास्तविक नुकसान का पता लगा रही हैं। साथ ही किसानों के साथ संवाद कर उन्हें राहत योजनाओं की जानकारी भी दी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह आंकलन जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि प्रभावित किसानों को समय पर आर्थिक सहायता दी जा सके।
स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बेमौसम बारिश और पानी की अधिकता के कारण गेहूं, सोयाबीन और अन्य खरीफ फसलों को नुकसान हुआ है। कलेक्टर ने सभी अधिकारियों से निर्देश दिए हैं कि नुकसान का आंकलन निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से किया जाए।
मुख्यमंत्री ने किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए कहा है कि किसी भी किसान को अपने फसल नुकसान के कारण आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े। इसके लिए जिला प्रशासन को पूरी तरह सक्रिय रहने और सभी प्रभावित किसानों तक राहत सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया गया है।
इस निर्देश के बाद उज्जैन जिले में कृषि विभाग, पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय अधिकारियों के बीच समन्वय बढ़ गया है। अधिकारी किसानों से लगातार संपर्क में हैं और उनकी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने का प्रयास कर रहे हैं।
