फूलों की होली बनी आकर्षण का केंद्र
रमणरेती आश्रम में आयोजित होली महोत्सव की सबसे बड़ी खासियत है फूलों की होली। यहां रंगों के साथ-साथ पुष्पवर्षा की जाती है, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय और रंगीन वातावरण में डूब जाता है। हल्के गुलाल की बौछार और रंग-बिरंगे फूलों की बारिश के बीच भजन-कीर्तन का आयोजन माहौल को और भी आध्यात्मिक बना देता है।
श्रद्धालु भगवान के जयकारों के साथ रंगों में सराबोर हो रहे हैं। ढोल, मंजीरे और भजनों की धुन पर पूरा आश्रम होली के उल्लास में झूमता नजर आ रहा है।
ब्रज में 40 दिनों तक चलता है रंगोत्सव
ब्रज क्षेत्र में होली का उत्सव करीब 40 दिनों तक मनाया जाता है। इसकी शुरुआत बसंत पंचमी से ही हो जाती है। ब्रज मंडल के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में यह पर्व केवल रंगों का नहीं बल्कि भक्ति, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना जाता है।
इसी कड़ी में मथुरा का रमणरेती आश्रम हर साल विशेष होली महोत्सव आयोजित करता है, जहां श्रद्धालु रंगों के साथ आध्यात्मिक आनंद का अनुभव करते हैं। आने वाले दिनों में बरसाना और नंदगांव में लठमार होली जैसे आयोजन भी उत्साह को चरम पर पहुंचाएंगे।
श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
21 फरवरी से शुरू हुए इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। सुबह से ही आश्रम परिसर में भक्तों की भीड़ दिखाई दे रही है। आरती, भजन और रंग-गुलाल के बीच श्रद्धालु उत्सव का आनंद ले रहे हैं।
सुरक्षा और व्यवस्थाएं
आयोजन को देखते हुए आश्रम प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए हैं। आगंतुकों से शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपील की गई है ताकि उत्सव की गरिमा बनी रहे।
ब्रज की यह होली केवल रंगों का उत्सव नहीं बल्कि श्रद्धा, प्रेम और परंपरा का अद्भुत संगम है। आने वाले दिनों में ब्रज की गलियां और अधिक रंगों और उल्लास से भर उठेंगी।
