चूंकि इन मैचों के लिए कोई ‘रिजर्व डे’ नहीं रखा गया है, इसलिए अंक साझा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। अब पाकिस्तान के पास कुल एक अंक है और आगे की राह बिल्कुल साफ है: “करो या मरो”। पाकिस्तान को अब 24 फरवरी को इंग्लैंड और 28 फरवरी को श्रीलंका के खिलाफ अपने दोनों बचे हुए मुकाबले हर हाल में जीतने होंगे। यदि पाकिस्तान ये दोनों मैच जीत लेता है, तो उसके पास कुल पांच अंक हो जाएंगे, जो उसे सेमीफाइनल के दरवाजे तक ले जाने के लिए पर्याप्त होंगे। तीन मैचों के ग्रुप में पांच अंक एक ऐसा ‘सेफ स्कोर’ है, जिसे पार करना किसी भी दूसरी टीम के लिए टेढ़ी खीर साबित होगा।
असली पेंच तब फंसेगा जब पाकिस्तान एक मैच जीते और एक हार जाए। ऐसी स्थिति में टीम के पास केवल तीन अंक होंगे और फिर बात “नेट रन रेट” और दूसरी टीमों के नतीजों पर टिक जाएगी। पाकिस्तान का इतिहास गवाह है कि नेट रन रेट के मामले में वह अक्सर पिछड़ जाता है, इसलिए एक भी हार या एक और मैच का बारिश में धुलना सीधे तौर पर टीम को टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखा सकता है। प्रशंसकों की दुआएं अब सिर्फ जीत के लिए नहीं, बल्कि साफ मौसम के लिए भी होंगी।
दिलचस्प बात यह है कि सांख्यिकीय दृष्टि से इस मैच के धुलने का पाकिस्तान और न्यूजीलैंड को थोड़ा फायदा भी हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सभी चारों टीमों को बराबर शक्तिशाली माना जाए, तो मैच रद्द होने से दोनों टीमों के खाते में एक गारंटीड अंक जुड़ गया है और हार का खतरा टल गया है। आंकड़ों के लिहाज से अब पाकिस्तान और न्यूजीलैंड की सेमीफाइनल में पहुंचने की संभावना लगभग 56.25% हो गई है, जबकि इंग्लैंड और श्रीलंका, जिन्हें अभी जोखिम भरे मैच खेलने हैं, उनकी संभावना 43.75% के आसपास है। हालांकि, यह गणित केवल तभी काम करेगा जब पाकिस्तान मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करे। फिलहाल, पाकिस्तान के लिए टूर्नामेंट का हर ओवर एक ‘फाइनल’ की तरह है।
