मैच शुरू होने से पहले ही अधिकांश जगहों पर टेबल फुल हो चुकी थीं। कई प्रतिष्ठानों ने खास थीम डेकोरेशन, तिरंगे की सजावट, स्पेशल फूड कॉम्बो और ग्रुप डिस्काउंट ऑफर पेश किए थे। परिवारों से लेकर कॉलेज स्टूडेंट्स तक, हर वर्ग के लोग अपनी-अपनी पसंदीदा टीम को सपोर्ट करते नजर आए। जैसे-जैसे मुकाबला रोमांचक होता गया, दर्शकों का उत्साह भी चरम पर पहुंचता गया। चौके-छक्कों पर तालियों और नारों से पूरा माहौल गूंज उठा।
हालांकि मैच का रुख बदलते ही माहौल भी बदल गया। भारतीय टीम की बल्लेबाजी लड़खड़ाने लगी और अहम विकेट गिरते ही रेस्टोरेंट्स में सन्नाटा पसरने लगा। उम्मीदें आखिरी ओवर तक टिकी रहीं, लेकिन टीम इंडिया की हार के साथ ही क्रिकेट प्रेमियों में निराशा छा गई।
कई प्रशंसकों ने कहा कि टीम से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, जबकि कुछ ने दक्षिण अफ्रीका की शानदार गेंदबाजी और रणनीति की तारीफ की। मैच खत्म होने के बाद लोग शांत मन से लौटते नजर आए, लेकिन चर्चा देर रात तक चलती रही।
कुल मिलाकर यह मुकाबला सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि शहर के लिए एक सामूहिक अनुभव बन गयाजहां जीत की उम्मीद ने जोश भर दिया और हार ने मायूसी।
