1. अंकुर (1974):
यह श्याम बेनेगल की पहली फिल्म थी और इसने रिलीज होते ही धमाका कर दिया। सामाजिक भेदभाव और मानवाधिकारों के मुद्दे पर बनी इस फिल्म ने 40 से ज्यादा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीते। शबाना आज़मी की भी यह पहली फिल्म थी, जिसने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया।
2. मंडी (1983):
वेश्यावृत्ति और समाज के दोहरे मानदंडों पर प्रहार करती यह फिल्म एक वेश्यालय की कहानी है। इसमें शबाना आज़मी और स्मिता पाटिल के बेजोड़ अभिनय ने इसे मील का पत्थर बना दिया। इस फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।
3. कलयुग (1981):
महाभारत के कथानक को आधुनिक कॉर्पोरेट जगत के परिप्रेक्ष्य में पेश करने वाली यह फिल्म एक मास्टरपीस है। इसमें दो परिवारों के बीच व्यापारिक दुश्मनी को बहुत ही गहराई से फिल्माया गया था।
4. जुबैदा (2001):
करिश्मा कपूर, रेखा और मनोज बाजपेयी अभिनीत यह फिल्म एक अलग ही मिजाज की प्रेम कहानी थी। इसमें एक राजकुमारी के संघर्ष और उसकी भावनाओं को बखूबी दिखाया गया था।
5. भूमिका (1977):
एक प्रसिद्ध मराठी अभिनेत्री के जीवन पर आधारित यह फिल्म दिखाती है कि कैसे एक सफल महिला की जिंदगी में आने वाले पुरुष उसके जीवन को प्रभावित करते हैं। स्मिता पाटिल ने इस रोल को अमर कर दिया।
6. निशांत (1975):
यह फिल्म सामंती समाज में उच्च वर्ग द्वारा किए जाने वाले शोषण की दर्दनाक दास्तां है। इस फिल्म को शिकागो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में गोल्डन प्लेक अवॉर्ड से नवाजा गया था।
7. मुजीब: द मेकिंग ऑफ ए नेशन (2023):
बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान की यह बायोपिक श्याम बेनेगल के करियर की हालिया महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक है। इसमें इतिहास के पन्नों को बड़ी ईमानदारी से पर्दे पर उतारा गया है।
8. सारांश:
यह फिल्म एक वृद्ध पिता के संघर्ष की मार्मिक कहानी है, जो अपने बेटे की असामयिक मृत्यु के बाद व्यवस्था से लड़ता है और फिर से जीना सीखता है।
9. जुनून (1978):
1857 के विद्रोह की पृष्ठभूमि पर बनी इस ऐतिहासिक फिल्म ने एक अंग्रेज लड़की और एक भारतीय नवाब शशि कपूर की जटिल प्रेम कहानी को दिखाया। इसकी भव्यता और निर्देशन आज भी सराहा जाता है।
10. मंथन (1976):
सहकारिता आंदोलन और ‘श्वेत क्रांति’ पर आधारित इस फिल्म की खास बात यह थी कि इसे गुजरात के 5 लाख किसानों ने 2-2 रुपये चंदा देकर फाइनेंस किया था।
