
यह प्रश्न गीता का हृदय है—
“जब सब छोड़ देते हैं, तब श्री कृष्ण क्या करते हैं?”
युद्धभूमि में खड़ा अर्जुन यही तो महसूस कर रहा था—
अपने लोग, अपने गुरु, अपने स्वजन…
सब सामने थे और भीतर से वह टूट चुका था।
हथियार गिर गए थे, मन हार गया था।
उसी क्षण श्री कृष्ण ने जो किया, वही इस मूल मंत्र का उत्तर है।
जब सब छोड़ देते हैं, तब श्री कृष्ण छोड़ते नहीं
महाभारत के युद्ध के आरंभ में,
अर्जुन ने कहा—
न योत्स्य इति गोविन्दम् उक्त्वा तूष्णीं बभूव ह ।
— भगवद्गीता 2.9
सरल अर्थ
“हे गोविंद! मैं युद्ध नहीं करूँगा।”
यह कहकर अर्जुन चुप हो गया।
यह वह क्षण था जब
शरीर ने साथ छोड़ा
मन ने साथ छोड़ा
तर्क ने साथ छोड़ा
सब कुछ छोड़ चुका था अर्जुन।
लेकिन श्री कृष्ण ने क्या किया?
श्री कृष्ण ने रथ नहीं छोड़ा।
कृष्ण ने अर्जुन नहीं छोड़ा।
श्री कृष्ण क्या करते हैं? — वे पहचान याद दिलाते हैं
कृष्ण ने अर्जुन को सबसे पहले यह नहीं कहा कि
“उठो, युद्ध करो।”
उन्होंने पहले डर की जड़ पर हाथ रखा।
अशोच्यानन्वशोचस्त्वं प्रज्ञावादांश्च भाषसे ।
गतासूनगतासूंश्च नानुशोचन्ति पण्डिताः ॥
— गीता 2.11
सरल भाषा में
तुम जिनके लिए शोक कर रहे हो,
वे शोक के योग्य नहीं हैं।
ज्ञानी जीवित या मृत—किसी के लिए शोक नहीं करता।
जब सब छोड़ देते हैं,
श्री कृष्ण तुम्हें याद दिलाते हैं कि
तुम कौन हो।
जब सब छोड़ देते हैं, तब श्री कृष्ण कहते हैं — तुम मरने वाले नहीं हो
अर्जुन का सबसे बड़ा डर था—
मृत्यु, विनाश, पाप।
कृष्ण ने सीधा कहा—
न जायते म्रियते वा कदाचित्
नायं भूत्वा भविता वा न भूयः ।
— गीता 2.20
सरल अर्थ
आत्मा न जन्म लेती है,
न मरती है।
जो मरता ही नहीं,
वह डरता किससे?
जब दुनिया कहती है—
“सब खत्म हो जाएगा,”
श्री कृष्ण कहते हैं—
“तुम खत्म होने वाले नहीं हो।”
जब सब छोड़ देते हैं, तब श्री कृष्ण कर्तव्य से जोड़ते हैं
डर हटाने के बाद,
श्री कृष्ण अर्जुन को उसके धर्म की याद दिलाते हैं—
स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः ।
— गीता 3.35
सरल अर्थ
अपने धर्म में मर जाना भी श्रेष्ठ है,
दूसरे का धर्म अपनाना भय को जन्म देता है।
मतलब साफ़ है—
भागना डर को बढ़ाता है,
कर्तव्य डर को गलाता है।
जब सब छोड़ देते हैं, तब श्री कृष्ण कहते हैं — मैं हूँ
गीता का सबसे भरोसेमंद वाक्य—
सर्वधर्मान् परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज ।
अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः ॥
— गीता 18.66
सरल भाषा में
सब सहारे छोड़ दो,
बस मेरी शरण आओ।
मैं तुम्हें मुक्त करूँगा—
डरो मत।
यह वह क्षण है जहाँ
सब साथ छोड़ सकते हैं
लेकिन श्री कृष्ण नहीं छोड़ते
अर्जुन के युद्ध से पहले का सार-संदेश
अर्जुन युद्ध जीतने से पहले
डर से मुक्त हुआ।
और यह मुक्ति किससे आई?
इस समझ से—
“मैं शरीर नहीं हूँ,
मैं आत्मा हूँ।
कर्तव्य मेरा काम है,
परिणाम श्री कृष्ण का।”
मूल मंत्र (एक पंक्ति में)
जब सब छोड़ देते हैं,
तब श्री कृष्ण तुम्हें नहीं छोड़ते—
वे तुम्हें तुम्हारा सत्य याद दिलाते हैं।
या सरल शब्दों में—
श्री कृष्ण समस्या नहीं हटाते,
वे समस्या से बड़ा बना देते हैं।
शुभ प्रभात
हरे कृष्ण..
दासानुदास चेदीराज दास
