हॉस्टल खाली करने का आदेश सिर्फ छात्राओं तक सीमित नहीं है। महाराजा यशवंतराव अस्पताल एमवायएच प्रबंधन ने कॉलेज प्राचार्य को भी शासकीय क्वार्टर खाली करने का नोटिस भेजा है। अस्पताल परिसर में बने स्टाफ क्वार्टर में रहने वाले लगभग 20 परिवार भी इस कार्रवाई से प्रभावित होंगे। प्रशासन का कहना है कि परिसर में नए भवन निर्माण की योजना है और वर्तमान हॉस्टल एवं क्वार्टर निर्माण कार्य के लिए बाधा बन रहे हैं।
हालांकि, छात्राओं का आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन ने अभी तक कोई वैकल्पिक आवास व्यवस्था नहीं की है। छात्राओं का कहना है कि वे आर्थिक रूप से इतनी सक्षम नहीं हैं कि निजी हॉस्टल या किराए के मकान में रहकर पढ़ाई जारी रख सकें। इस बीच प्रशासनिक संवेदनशीलता और छात्र कल्याण पर सवाल उठ रहे हैं।
छात्राओं ने लिखित आदेश और पुनर्वास की मांग की है। उनका कहना है कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के हॉस्टल खाली करना उचित नहीं है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह मामला सामाजिक और प्रशासनिक विवाद का रूप ले सकता है।
स्थिति गंभीर होने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई तात्कालिक कदम नहीं उठाया गया है। छात्राएं चिंता में हैं कि उनका शैक्षणिक वर्ष प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि छात्राओं और स्टाफ परिवारों के हितों को देखते हुए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट हो रहा है कि नए निर्माण कार्य की आवश्यकता तो हो सकती है, लेकिन उससे जुड़े प्रशासनिक निर्णयों में छात्र और कर्मचारी कल्याण को प्राथमिकता देना अनिवार्य है। फिलहाल कॉलेज और अस्पताल प्रबंधन पर दबाव बढ़ता जा रहा है, ताकि छात्राओं और प्रभावित परिवारों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक विकल्प सुनिश्चित किया जा सके।
