इससे पहले पिछले वर्ष मजिस्ट्रेट अदालत ने राउत को भारतीय दंड संहिता की मानहानि से जुड़ी धारा के तहत दोषी ठहराते हुए 15 दिन के कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। हालांकि, सजा पर रोक लगा दी गई थी ताकि वे उच्च अदालत में आदेश को चुनौती दे सकें। इसके बाद राउत ने सत्र अदालत में अपील दायर की थी।
मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनी गईं। सुनवाई कर रहे न्यायाधीश महेश जाधव ने इस महीने की शुरुआत में अंतिम बहस पूरी होने के बाद राउत की याचिका मंजूर कर ली।
शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार, वर्ष 2007 में निविदा प्रक्रिया के जरिए यह काम पांच गैर-सरकारी संगठनों को सौंपा गया था, जिनमें से एक संस्था सोमैया परिवार से संबंधित थी।
मजिस्ट्रेट अदालत ने अपने पूर्व आदेश में कहा था कि मेधा सोमैया एक शिक्षित और प्रतिष्ठित व्यक्तित्व हैं तथा आरोपों से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा और मानसिक पीड़ा हुई। साथ ही यह भी टिप्पणी की गई थी कि एक सांसद होने के नाते सार्वजनिक बयान देते समय राउत पर उच्च स्तर की जिम्मेदारी होती है।
अब सत्र अदालत के फैसले के बाद राउत को इस मामले में राहत मिल गई है।
