गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए 12 विशिष्ट इंजीनियरिंग और न्यूरोसाइंस पदों पर भर्ती की जानकारी साझा की। इन पदों पर सालाना 10 लाख से लेकर 45 लाख रुपये या उससे अधिक का पैकेज मिलने की संभावना है। शुरुआती स्तर के इंजीनियरों से लेकर वरिष्ठ वैज्ञानिकों तक के लिए अवसर उपलब्ध हैं।
हालांकि इस भर्ती की सबसे विवादित और चर्चित शर्त इसकी ‘फिटनेस अनिवार्यता’ है। चूंकि Temple का फोकस एथलीट्स के लिए उत्पाद विकसित करना है, इसलिए गोयल चाहते हैं कि उनकी टीम के सदस्य भी खुद एथलीट हों। इसके तहत पुरुष आवेदकों का बॉडी फैट प्रतिशत 16% से कम और महिलाओं का 26% से कम होना आवश्यक है। इस अनोखी शर्त ने सोशल मीडिया पर काफी चर्चा और प्रतिक्रियाएं पैदा की हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से स्टार्टअप को तकनीकी दक्षता के साथ-साथ वास्तविक एथलीट अनुभव भी मिलेगा। टीम के सदस्य खुद फिट और सक्रिय होने के कारण उत्पाद के डिजाइन और परीक्षण में बेहतर योगदान दे सकेंगे। हालांकि कुछ लोगों ने इस फिटनेस मानक को लेकर विवाद भी उठाया है और इसे प्रतिभा चयन में बाधा मान रहे हैं।
Temple का यह प्रोजेक्ट एथलीट्स के प्रदर्शन और स्वास्थ्य पर आधारित डेटा-संचालित समाधान प्रदान करेगा। इस वियरेबल डिवाइस से खिलाड़ियों के दिमाग और शरीर की गतिविधियों का वास्तविक समय ट्रैकिंग संभव होगी। दीपिंदर गोयल का यह नया प्रयोग स्टार्टअप और न्यूरोटेक जगत में काफी उम्मीदों और उत्सुकता के साथ देखा जा रहा है।
Temple स्टार्टअप में 12 पदों पर खुली भर्ती ने तकनीकी और वैज्ञानिक समुदाय के बीच हलचल मचा दी है। एथलीट-केंद्रित फिटनेस शर्त ने इसे अलग और ध्यान आकर्षित करने वाला अवसर बना दिया है। साथ ही, यह दिखाता है कि भविष्य के स्टार्टअप न केवल तकनीकी दक्षता बल्कि वास्तविक अनुभव और स्वास्थ्य मानकों को भी प्राथमिकता दे रहे हैं।
