नई दिल्ली । सनातन धर्म में एकादशी व्रत का अपना विशेष महत्व है। इसमें कृष्ण पक्ष की एकादशी को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इसी श्रेणी में पापमोचनी एकादशी का व्रत आता है। इस वर्ष यह व्रत 15 मार्च 2026 रविवार को रहेगा और इसका पारण 16 मार्च को किया जाएगा।
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व होता है। तुलसी तुल्य सामग्री के साथ पूजा करने से जिसे भगवान विष्णु प्रिय माना गया है विशेष लाभ की प्राप्ति होती है। इसलिए इस दिन तुलसी चालीसा का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
पूजा विधि
स्नान और स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद घर के पूजा स्थान या मंदिर में भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। पूजा में धूप दीप फूल फल और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। कई स्थानों पर भक्त चालीसा का पाठ और व्रत कथा सुनते हैं।
तुलसी चालीसा का महत्व
तुलसी चालीसा का महत्व
चालीसा में तुलसी माता का गुणगान किया गया है और इसे पाठ करने वाले को भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। शास्त्रों के अनुसार इस चालीसा के पाठ से जीवन के संकट समाप्त होते हैं सुख समृद्धि आती है और भक्त अपने पापों से मुक्ति पाते हैं।
व्रत के नियम
पापमोचनी एकादशी के दिन व्रत रखने वाले को भोजन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। कथा और पूजा के बाद ही भोजन करें। दिन भर में जल और फल का सेवन किया जा सकता है। एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी 16 मार्च 2026 को किया जाता है।
चालीसा के कुछ प्रमुख दोहे और चौपाई
नमो नमो तुलसी महारानी महिमा अमित न जाय बखानी।
दियो विष्णु तुमको सनमाना जग में छायो सुयश महाना।
तुलसी मैया तुम कल्याणी तुम्हरी महिमा सब जग जानी।
भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे गा गाकर मां तुझे रिझावे।
भक्त इस चालीसा का पाठ करते हुए मन वचन और कर्म से माता तुलसी की सेवा करें। ऐसा करने से जीवन में आध्यात्मिक उन्नति और परम सुख की प्राप्ति होती है।
