नर्मदापुरम 15,मार्च,2026(हिन्द संतरी) माँ नर्मदा के संरक्षण और नदी के प्रति समाज की जिम्मेदारी को लेकर रविवार को नर्मदापुरम के कोरीघाट स्थित नर्मदा रिवर व्यू में रेवा सेवा समागम का आयोजन किया गया। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद और नर्मदा समग्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस एक दिवसीय प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्यक्रम में संत-महात्माओं, जनप्रतिनिधियों, पर्यावरणविदों, सामाजिक संगठनों और युवाओं नर्मदा समग्र से न्याससी नर्मदा सदस्य सच्चानंद वासवानी, बृजकिशोर भार्गव, कार्तिक सप्रे उपस्थित रहे। कार्यशाला का संचालन श्री मनोज जोशी द्वारा किया गया। कार्यशाला में नर्मदा संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने कहा कि नर्मदा केवल एक नदी नहीं बल्कि प्रदेश की जीवनरेखा है। उन्होंने कहा कि नर्मदा के संरक्षण के लिए सरकार के प्रयासों के साथ-साथ समाज की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। यदि हर व्यक्ति अपने स्तर पर नदी और उसके तटों को स्वच्छ रखने का संकल्प ले, तो नर्मदा को प्रदूषण से मुक्त रखना संभव है। उन्होंने युवाओं और सामाजिक संगठनों से नर्मदा संरक्षण के लिए आगे आने की अपील की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष (राज्यमंत्री दर्जा) मोहन नागर ने की। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि नर्मदा संरक्षण केवल प्रशासन या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज का दायित्व है। उन्होंने कहा कि नर्मदा को बचाने के लिए जन जागरूकता और जनसहभागिता को बढ़ाना होगा। जब समाज स्वयं आगे आएगा, तभी नर्मदा संरक्षण का अभियान स्थायी रूप से सफल हो सकेगा।
विशिष्ट अतिथि के रूप में राज्यसभा सांसद माया नारोलिया ने कहा कि नर्मदा नदी प्रदेश की आस्था, संस्कृति और अर्थव्यवस्था से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि नदी का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा विषय है। यदि आज हम नर्मदा के प्रति संवेदनशील नहीं होंगे तो आने वाली पीढ़ियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
सेाहागपुर विधायक विजयपाल सिंह ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि नर्मदा संरक्षण में समाज की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए नदियों, जंगलों और जल स्रोतों का संरक्षण जरूरी है। यदि हम प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर नहीं चलेंगे तो जल संकट और पर्यावरणीय समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं।
कार्यक्रम में आध्यात्मिक मार्गदर्शन देते हुए महंत स्वामी अनंतवन महाराज ने कहा कि माँ नर्मदा भारतीय संस्कृति और आस्था का प्रतीक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि नर्मदा को पवित्र और स्वच्छ बनाए रखने के लिए अपने दैनिक जीवन में भी जागरूकता लाएं। उन्होंने कहा कि नदी में कचरा या प्लास्टिक फेंकना केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना नहीं बल्कि हमारी आस्था का भी अपमान है। इसी क्रम में नरसिंह विजेंद्र सरस्वती दंडी स्वामी महाराज ने नर्मदा की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नर्मदा केवल जलधारा नहीं बल्कि भारतीय सभ्यता की धरोहर है। उन्होंने कहा कि नर्मदा के तटों पर सदियों से संत-महात्माओं की साधना होती रही है और यह नदी समाज को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती है।
कार्यक्रम की रूपरेखा मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के कार्यपालक निदेशक डॉ. बकुल लाड़ द्वारा प्रस्तुत की गई। उन्होंने नर्मदा संरक्षण के लिए परिषद द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए कहा कि समाज की सक्रिय भागीदारी के बिना नदी संरक्षण का लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने बताया कि परिषद द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम, प्रशिक्षण और जनअभियान चलाकर लोगों को नर्मदा संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा रहा है। रेवा सेवा समागम के दौरान आयोजित तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन दिया गया। नर्मदा जलग्रहण क्षेत्र में जैविक और प्राकृतिक कृषि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रासायनिक खेती से न केवल मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है बल्कि जल स्रोत भी प्रदूषित होते हैं। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह दी, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहे और नदियों में रासायनिक प्रदूषण कम हो।
ब्रजकिशोर भार्गव ने सामाजिक सहभागिता के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि नर्मदा संरक्षण का अभियान तभी सफल होगा जब समाज के हर वर्ग की इसमें भागीदारी होगी। उन्होंने कहा कि गांव-गांव में जागरूकता फैलाकर लोगों को नदी संरक्षण के लिए प्रेरित करना जरूरी है। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर ने भी एक सत्र में नर्मदा नदी और उसकी सहायक नदियों के संरक्षण पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि यदि सहायक नदियों और जल स्रोतों का संरक्षण नहीं किया गया तो नर्मदा के अस्तित्व पर भी खतरा बढ़ सकता है। इसलिए जलग्रहण क्षेत्र में व्यापक स्तर पर संरक्षण कार्यों की आवश्यकता है।
घाट संस्कृति और घाट संरक्षण के विषय पर मार्गदर्शन देते हुए कहा कि नर्मदा के घाट केवल धार्मिक स्थल नहीं बल्कि सांस्कृतिक विरासत भी हैं। उन्होंने कहा कि घाटों की स्वच्छता और संरक्षण के लिए स्थानीय समाज को आगे आना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को विभिन्न समूहों में बांटकर समूह चर्चा भी आयोजित की गई, जिसमें नर्मदा संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। समूहों द्वारा अपने निष्कर्ष प्रस्तुत किए गए और नर्मदा संरक्षण के लिए विभिन्न सुझाव सामने आए। प्रतिभागियों ने मिलकर नर्मदा संरक्षण के लिए जनसहभागिता को मजबूत करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि यदि समाज, संत-महात्मा, प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर प्रयास करें तो नर्मदा को स्वच्छ और अविरल बनाए रखने का लक्ष्य निश्चित रूप से हासिल किया जा सकता है।
रेवा सेवा समागम ने नर्मदा संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ समाज में यह संदेश भी दिया कि नदी संरक्षण केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि सतत जनआंदोलन होना चाहिए। कार्यक्रम में संभाग समन्वयक नर्मदापुरम एवं भोपाल, जिला समन्वयक नर्मदापुरम,सीहोर,हरदा एवं विकासखंड समन्वयक एवं सहित बड़ी संख्या में नर्मदा समितियों के सदस्य,सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र-छात्राएं, प्रस्फुटन व नवांकुर सदस्य और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
नर्मदा तट को स्वच्छ रखने के लिए किया गया श्रमदान
माँ नर्मदा के तट को स्वच्छ और पवित्र बनाए रखने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद द्वारा श्रमदान अभियान आयोजित किया गया। इस अभियान में जन अभियान परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष पद्मश्री मोहन नगर, सांसद माया नारोलिया और ज.अ.प. के कार्यपालक निदेशक श्री बकुल लाड, नर्मदा समग्र से श्री मनोज जोशी एवं जन अभियान परिषद नर्मदापुरम के सामाजिक कार्यकर्ता एवं सीएमसीएलडीपी छात्र छात्राओं, नवांकुर संस्था एवं नर्मदा समग्र प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
