नर्मदापुरम 19 ,मार्च,2026(हिन्द संतरी ) विक्रम महोत्सव 2026 के अंतर्गत नर्मदा महाविद्यालय के ऑडिटोरियम में सूर्य उपासना के कार्यक्रम के साथ ही ब्रम्ह ध्वज की स्थापना कर सम्राट विक्रमादित्य की वीरता एवं न्याय प्रियता पर आधारित नाटक का मंचन किया गया। गुरुवार को नर्मदा महाविद्यालय के ऑडिटोरियम में नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती नीतू महेंद्र यादव एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हिमांशु जैन ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलन कर ब्रम्ह ध्वज को प्रणाम कर विधिवत विक्रम संवत 2083 के अंतर्गत कार्यक्रमों का शुभारंभ किया। सम्राट विक्रमादित्य की वीरता एवं न्याय प्रियता पर आधारित बेताल शक नाटक का मंचन किया गया। इस नाटक के माध्यम से बताया गया कि सम्राट विक्रमादित्य ने आक्रांता शको को पराजित कर भारतवर्ष को उनके आक्रमण से मुक्त कर देश की रक्षा की एवं वैदिक काल गणना पर आधारित विक्रम संवत की शुरुआत की थी। काल की गणना भी विक्रम संवत के आधार पर की जाती है, काल की गणना चंद्र पर आधारित होती है। पंचांग के आधार पर तिथियां की गणना होती है और इस आधार पर हिंदू धर्म के तीज, पर्व एवं त्यौहार मनाए जाते हैं।
आयोजित कार्यक्रम में सम्राट विक्रमादित्य की महानता और उनके शासनकाल की उपलब्धियां पर आधारित जानकारी उपस्थित लोगों को दी गई। सम्राट विक्रमादित्य के जीवन एवं उनके शासनकाल में आने वाली समस्याओं एवं सम्राट विक्रमादित्य द्वारा उसका निश्चित निराकरण करने पर आधारित नाटक का मंचन किया गया। नाट्य समूह के निर्देशक रत्नेश साहू एवं सह निर्देशक संजय श्रोतीय थे। समूह साथी जन शिक्षण एवं संस्कृति समिति के तत्वावधान में आयोजित नाटक में नितिन रोहर ने सम्राट विक्रमादित्य की भूमिका अभिनीत की, उनके द्वारा अभिनीत भूमिका की सभी ने तालियां बजा कर सराहना की। मंगलेश सिंगारिया ने राजगुरु, प्रेम शंकर मांगरोल ने गंधर्व सेन की, मुकेश मालवीय ने दादाजी, शिवन्या श्रोतीय ने पोता की, नर्मदा प्रसाद हरियाले ने गरीब किसान, दीपक बेन ने बेताल, भावना विश्वकर्मा ने रानी पद्मिनी, चैन सिंह मीणा ने मंत्री विष्णु दत्त की, उर्वशी श्रोतीय ने गुप्तचर चंद्रकांता, प्रियांशी गौर ने हरसिद्धि माता और राज नर्तकी की, देवी सिंह पटवा ने राज पंडित की, आसमादित्य तिवारी ने सैनिक, अभिषेक अहिरवार ने सैनिक, एवं पल्लवी दुबे ने राज नर्तकी की भूमिका सार गर्भित तरीके से निभाई। विशेष सहयोग विमल सिंह राजपूत ने किया। नाटक के माध्यम से बताया गया कि महान सम्राट विक्रमादित्य ने भारतवर्ष को शकों के आक्रमण से मुक्त कराया एवं शकों की विधवा पत्नियो का पुनर्वास कर उनके बच्चों की शिक्षा दीक्षा की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की। वह इतने न्याय प्रिय थे कि उन्होंने अपनी रानी पद्मिनी को भी वनवास देकर तांत्रिक को कारावास की सजा दी। उनकी न्याय प्रियता की प्रजा सराहना करती थी। उनकी वीरता एवं न्याय प्रियता से प्रभावित होकर मां हरसिद्धि ने चैत्र नवरात्रि में विक्रम संवत की गणना प्रारंभ करने का आशीर्वाद दिया एवं उन्हें 32 पुतलियो वाला सिंहासन प्रदान किया था। मां हर सिद्धि ने कहा कि वर्तमान में ना सम्राट विक्रमादित्य जैसा कोई सम्राट है और ना कभी भविष्य में उनके जैसा सम्राट होगा। सम्राट विक्रमादित्य ने अनेक राज्यों को जीतकर वहां पर वेधशाला खुलवाया। उन्होंने वैदिक काल गणना को बढ़ावा दिया। सम्राट विक्रमादित्य के नवरत्न थे जिनमें प्रमुख रूप से कालिदास, धनवंतरी, छपणक, अमर सिंह, शंकु, बेताल भट्ट, वराह मिहिर, घटकरपर, वरुचि थे। यह महान विभूतियां आयुर्वेद, व्याकरण, ज्योतिष, वैदिक काल गणना, काव्य और नीति शास्त्र जैसे विभिन्न क्षेत्र में पारंगत थे। नाट्य प्रस्तुति के बाद नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती नीतू महेंद्र यादव ने सभी को विक्रम संवत हिंदू नव वर्ष की शुभकामनाएं दी। उन्होंने सभी मंचीय कलाकारों की नाट्य प्रस्तुति की सराहना की। श्रीमती यादव ने कहा कि आज विक्रम संवत चैत्र नव वर्ष मनाया जा रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन एवं उपस्थित सभी लोगों को धन्यवाद ज्ञापित किया।
विक्रम महोत्सव के दौरान आयोजित कार्यक्रम में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हिमांशु जैन, अपर कलेक्टर अनिल जैन, बृजेंद्र रावत, सिटी मजिस्ट्रेट देवेंद्र प्रताप सिंह, एसडीएम जय सोलंकी, नगर पालिका अधिकारी श्रीमती हिमेश्वरी पटले, महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी ललित डेहरिया, जिला शिक्षा अधिकारी एलएन प्रजापति, महाविद्यालय के प्राचार्य राम कुमार चौकसे, तहसीलदार शक्ति सिंह तोमर एवं दिव्यांशु नामदेव तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं प्राध्यापक गण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डीपीसी श्री राजेश जायसवाल ने किया।
