इस सूची में शामिल प्रमुख कंपनियों में बीटा नेफ्थोल गिल्ट पैक लिमिटेड एस कुमार्स नेशनवाइड और रूची सोया इंडस्ट्रीज हैं। बीटा नेफ्थोल का रजिस्टर्ड ऑफिस इंदौर में है जबकि मुख्य फैक्ट्री खरगोन जिले के बड़वाह में थी। कंपनी ने बैंक लोन लेकर व्यवसाय में निवेश करने की बजाय फंड डाइवर्ट करने के आरोपों का सामना किया और इसे 2014 से विलफुल डिफॉल्टर की श्रेणी में रखा गया। वर्तमान में कंपनी परिसमापन (Liquidation) प्रक्रिया में है और प्रमोटरों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं।
गिल्ट पैक लिमिटेड धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थित है। कंपनी पर जानबूझकर लोन न चुकाने और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप हैं। सेबी ने इसके निदेशकों को पूंजी बाजार में प्रतिबंधित किया और बैंकों ने क्रेडिट सुविधा रोक दी।
एस कुमार्स नेशनवाइड का मुख्यालय मुंबई में था लेकिन उत्पादन इकाइयां देवास और खंडवा में थीं। भारी कर्ज न चुकाने और फंड हेराफेरी के कारण 2015 में यह टॉप 10 लिस्ट में पांचवें स्थान पर थी। SFIO ने इसके खिलाफ जांच की और बैंकों ने मिलों को कुर्क कर नीलामी की।
रूची सोया इंडस्ट्रीज का जन्म और मुख्यालय इंदौर में था। 2019 की रिपोर्ट में कंपनी ₹1 62 398 लाख के बकाया के साथ टॉप 10 में थी। जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद यह IBC दिवाला संहिता के तहत गई और बैंकों का बकाया पतंजलि आयुर्वेद द्वारा अधिग्रहित किया गया।
सबसे बड़ा मामला है जूम डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड का जिसे एमपी का सबसे पुराना और बड़ा महाडिफॉल्टर माना जाता है। इसका पंजीकृत कार्यालय इंदौर में है और प्रमोटर विजय चौधरी का मुख्य कार्यक्षेत्र भी इंदौर रहा। यह कंपनी 2014 2015 और 2016 में टॉप 10 विलफुल डिफॉल्टर्स की सूची में पहले स्थान पर रही। बकाया राशि 2014 में ₹1 89 030 लाख 2018 में ₹1 65 657 लाख और 2022 में ₹2 16 617 लाख थी।
जूम डेवलपर्स के खिलाफ भारत की प्रमुख जांच एजेंसियों ने कार्रवाई की है। प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया और विदेशों में फर्जी कंपनियों के जरिए फंड डाइवर्ट करने के आरोप लगाए। सीबीआई ने बैंक धोखाधड़ी और जालसाजी में FIR दर्ज की। इंटरपोल ने प्रमोटर विजय चौधरी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया। बैंकों ने कंपनी को विलफुल डिफॉल्टर घोषित कर परिसमापन प्रक्रिया शुरू की है। मध्य प्रदेश की ये कंपनियां न केवल टॉप 10 लिस्ट में शामिल हैं बल्कि अरबों रुपए का बकाया दबाकर देश में वित्तीय सुशासन पर सवाल खड़े कर रही हैं।
