मंदिर परिसर में नवरात्र के दौरान मेले का आयोजन भी किया गया है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचकर पूजा अर्चना कर रहे हैं। मंदिर प्रशासन ने भक्तों की सुविधा के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की भी व्यवस्था की है। बड़ी माता को दतिया शहर की कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है और हर साल नवरात्र में उनके दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ती है।
इतिहास के अनुसार दतिया रियासत के राजा विजय बहादुर ने 1839 से 1857 के बीच इस मंदिर की स्थापना कराई थी। मान्यता है कि राजा ने अपनी त्वचा रोग से मुक्ति पाने के लिए देवी की स्थापना कराई थी। लोकविश्वास है कि चेचक जैसी बीमारियों में देवी को जल अर्पित कर पीड़ित को पिलाने से लाभ मिलता है।
बुंदेला राजाओं का बनारस से संबंध रहा है और वे देवी उपासक थे। शहर में मांगलिक कार्यों की शुरुआत आज भी बड़ी माता के पूजन से होती है। नवरात्र के दौरान नवमी और दशमी पर यहां जवारे चढ़ाने की परंपरा निभाई जाती है। यह मेला न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
भक्तों का कहना है कि माता का दिव्य श्रृंगार और मंदिर का वातावरण उन्हें आध्यात्मिक ऊर्जा और मानसिक शांति प्रदान करता है। बड़े माता के दर्शन और विशेष पूजा अर्चना के कारण नवरात्र के अवसर पर मंदिर में भक्तों की उपस्थिति हर साल बढ़ती ही जा रही है।
