जहाँ पूरे विश्व में हाहाकार मचा हुआ है वहीं भारत इन सब से अछूता चैन की वंशी बजा रहा है।ये मौजूदा सरकार की कूटनीतिक सूझबूझ का नतीजा है।अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिड़े जंग को आज बीस दिन से ऊपर हो गए।स्ट्रेट ऑफ होरमुज़ से जहाजों का निकलना मुश्किल हो गया है।ईरान वहाँ से जहाजों को निकलने नही दे रहा है।ऐसे में विश्व में तेल और गैस संकट गहरा गया है।ऐसे में केवल भारतीय जहाजों को निकलने की अनुमति है तो ये भारतीय कूटनीति का नतीजा है।आज भारत के सभी देशों से मित्रता है।जहाँ इजरायल को लगता है कि भारत उसका सच्चा मित्र है तो वहीं ईरान को भी लगता है कि भारत उसका सच्चा दोस्त है।आज खाड़ी के देशों से भारत के रिश्ते बहुत अच्छे हैं इसलिए अगर स्थिति बिगड़ती है तो खाड़ी के देशों से तेल और गैस की आपूर्ति होती रहेगी।लेकिन इस युद्ध से तेल के दाम बेतहाशा बढ़ेंगे जिससे पूरे विश्व की आर्थिक स्थिति कमजोर होगी।पूरे विश्व को महंगाई का सामना करना पड़ेगा।
अगर ये युद्ध अभी नही रुकता है तो आने वाले समय में हमारे देश में भी गैस और तेल के दाम स्वतः बढ़ेंगे।अमेरिका और इजरायल ने ईरान की सैन्य क्षमता को कमतर आंका और इसी का नतीजा है ये युद्ध खत्म होने का नाम नही ले रहा है।कभी दुश्मन की क्षमता को कम नही आँकना चाहिय।ऐसा करने से यही नजीता होता है जो अब हो रहा है।इजरायल की ख़ुफ़िया एजेंसियों ने खामनेई को सही लोकेशन जरूर ढूंढ लिया लेकिन उनलोगों ने ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता का आकलन करने में बुद्धिमत्ता नही दिखाई।मौजूदा युद्ध में ईरान तो बर्बाद होगा ही लेकिन इसके साथ इजरायल के भी बड़ा नुकसान होगा।अमेरिका को कोई ख़ास नुकसान नही होने वाला है।अमेरिका सम्पन्न देश है उसके लिए ये युद्ध केवल टाइम पास है।ट्रम्प केवल मजे लेने के लिए ये युद्ध लड़ रहा है।
ईरान से अमेरिका को कोई डायरेक्ट खतरा कभी नही था और ना होगा।लेकिन इजरायल को ईरान से हमेशा खतरा बना रहता है।हिजबुल्लाह, हूती और हमास इजरायल के लिये हमेशा से सिरदर्द रहे हैं।ईरान इनको परोक्ष रूप से समर्थन करता रहा है।इसलिए इजरायल के ईरान के साथ युद्ध कुछ हद तक वाज़िब ठहराया जा सकता है।ईरान का कमजोर होना इजराइल के हित में है।ये युद्ध धीरे धीरे विश्व युद्ध की तरफ बढ़ता जा रहा है।ये सिर्फ तीन देशों की लड़ाई नही रह गई बल्कि इसकी आँच खाड़ी देशों को अपने चपेट में लेता जा रहा है।भारत की कूटनीति के चलते अभी तो भारत को कोई दिक्कत तो नही है लेकिन इसकी भी एक सीमा है उसके बाद भारत के लिए मुसीबत खड़ा होने वाला है।विश्व में तेल के दाम बढ़ेंगे तो भारत में भी तेल के दाम बढ़ेंगे और उसके साथ ही देश में महंगाई भी अपनी चरम सीमा पर पहुँचेगी।ईरान अब कतर में गैस प्लांट पर हमला करके अरब देशों को एकजुट होने का अवसर प्रदान कर दिया है। अब अरब देश भी भी हो सकता है कि आने वाले समय में ईरान के प्रति कड़ा रुख अपनाएंगे।इस युद्ध से हमें भी कुछ सीखने की जरूरत है।
आज हमारे किसी भी शहर में बंकर मौजूद नही है जब कोई देश हमपर मिसाइल से हमला करे तो हम किसी बंकर में छुप सकें।बॉर्डर के इलाकों कुछ बंकर जरूर बने हैं लेकिन वह भी वहाँ के लोगों के लिए पर्याप्त नही है।देश की राजधानी दिल्ली का सबसे बुरा हाल है।अगर दिल्ली में हमला होता है तो वहाँ एक झटके में पूरे शीर्ष नेतृत्व का खात्मा हो जाएगा।वह चाहे राजनीतिक हो या सैनिक नेतृत्व।हमें भविष्य की चिंता अवश्य करनी चाहिये।प्यास लगने पर कुंआ खोदने से कुछ फायदा नही होगा।ये युद्ध हमारे लिए एक सीख है और हमें भविष्य के लिए उसी स्तर पर सैन्य तैयारी करनी होगी।अपने सैन्य खर्चे में बढ़ोतरी होनी ही चाहिय। लोगों को अपने घर में एक बेसमेंट जरूर बनवाना चाहिय।इसके अलावा हर शहर में कुछ सामुदायिक बंकर अवश्य होना चाहिए।आज हमारा देश हरेक देश से अच्छे संबंध बनाकर जरूर रखा है लेकिन भविष्य के गर्त में क्या छुपा है ये कोई नही जानता है।मुसीबत कभी भी आ सकती है।हमें उसके लिए तैयारी पहले से ही कर लेनी चाहिए।मौजूदा संसद जो बना है उसमें बंकर है कि नही मुझे पता नही है अगर नही है तो ये बहुत बड़ा वेवकूफी वाला कदम होगा।कितने सेना मुख्यालय है जहाँ बंकर की सुविधा उपलब्ध होगी।मेरे ख्याल से ना के बराबर।
आज इजरायल में डोम सिस्टम भी कारगर साबित नही हो रहा है।आप गिरते हुए मिसाइल को सौ प्रतिशत नही रोक सकते हो।रूस के पास भी भी ड्रोन और मिसाइल रोकने की क्षमता है लेकिन इसके बावजूद यूक्रेन रूस के अंदर ड्रोन से हमले कर देता है।युद्ध में आप कुछ भी तैयारी कर लें कहीं ना कहीं चूक1हो ही जाती है।बेहतर यही है कि युद्ध की स्थिति से पूरा विश्व बचे।लेकिन ये इंसानी फितरत है कि वह चैन से नही बैठ सकता है और ना दूसरे को चैन से बैठने दे सकता है।पाकिस्तान का भारत से कोई लेना देना नही है फिर भी वह भारत में आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त रहता है।पाकिस्तान कश्मीर में कुछ नही कर सकता है लेकिन कश्मीर के नाम पर ना जाने कितने निर्दोष लोगों का जान लेते रहता है।पाकिस्तान से आने वाले आतंकवादियों को ये पता रहता है कि भारत में घुसने के बाद उनका अंजाम क्या होगा लेकिन फिर भी वे घुसपैठ करते रहते हैं।उनकी सरपरस्ती पाकिस्तान की सरकार करते रहती है।पाकिस्तान दरअसल कुत्ते की दुम है जिसे सीधा नही किया जा सकता है।आज भारत के संबंध सभी देशों से है लेकिन पडोस रहने वाले सिर्फ पाकिस्तान से नही है।उसका खामियाजा वहाँ की जनता को उठाना पड़ रहा है।अगर पाकिस्तान जाने वाली पानी पर पूर्णतः रोक लग जायेगी तो पाकिस्तान में हाहाकार मचना स्वाभाविक होगा।अभी हमारे पास वह तंत्र विकसित नही हो पाया है और उसको विकसित होने में दस साल लग जाएंगे।लेकिन आने वाले समय में हमारे देश के लिए पाकिस्तान से खतरा बना रहेगा इसलिए इसकी पूरी तैयारी रखनी होगी।सरकार को ऊर्जा के वैकल्पिक व्यवस्था पर जोर देने की जरूरत है।
हमें सोलर पावर प्लांट को विकसित करने की आवश्यकता है क्योंकि भविष्य जब गैस और तेल के दाम बढ़े तो हमारे पास ऊर्जा का एक श्रोत तो होना चाहिए।अभी सोलर ऊर्जा बहुत महंगा है।इसके पैनल को लगाने में बहुत खर्च आता है इसलिए लोग इसका उपयोग नही कर पा रहे हैं।वही हाल पवन चक्की का है।उसका भी कोई ख़ास फायदा नही हो पा रहा है।हमारे देश के लिए ये दोनों ऊर्जा के अच्छे विकल्प साबित हो सकते हैं।विदेश नीति को बेहतर बनाने के साथ साथ हमें अपने संसाधनों का भी बेहतर उपयोग करना होगा।इसके लिये देश के वैज्ञानिकों को इसमें बढ़ चढ़कर हिस्सा लेना होगा।अच्छे युवा वैज्ञानिक देश छोड़कर दूसरे देश में जाकर अपनी सेवाएं देते हैं ये सीधे तौर देश के साथ गद्दारी है।आज इजरायल का कोई भी युवा दूसरे देश में काम करते नही मिलेगा।उनको अपने देश से प्रेम है।वही भावना अपने देश के युवाओं में होनी चाहिए तभी देश का विकास होगा
द्वारा डॉ संजय श्रीवास्तव महू7000586652
