जब से बीजेपी कि सरकार केंद्र मे सत्ता मे आयी है तभी से भारतीय विदेश नीति एक ड्रामा और मजाक सी कहानी बनती जा रही है। राजदरबारी राजा के सुन्दर कपड़ों ( आभासी कपड़े ) को देखकर खूब प्रशंसा करते रहे रहे है और तालियां बजा बजा कर , राजा को अपने नंगेपन का एहसास ही नही होने दे रहे है। लेकिन अंतर राष्ट्रीय राजनैतिक संबंधों के जानकार और मेरे जैसे विद्यार्थी जिन्होंने इस विषय पर एम ए किया हो , उनके लिए जो कुछ चल रहा है वो एक छलावे से कम नही है। एक समय था जब, हालांकि इतने शक्तिशाली हथियार और संसाधन हमारे पास नही थे लेकिन नेहरूजी और,इंदिराजी ने जिस तरह कि अंतर राष्ट्रीय कूटनितिक दक्षता के साथ भारतीय विदेश नीति का संचालन किया उसका लोहा विश्व के सभी देश मानते थे। सोवियत रूस से हमारे इतने प्रगाड़ मैत्री सबंध थे कि चीन और अमेरिका कांपते थे। पाकिस्तान को तो हम 1971 मे धूल चटा ही चुके थे। सभी देशों के प्रमुख इंदिराजी से हाथ मिलाने को आतुर रहते थे। हाल के वर्षों मे उल्टा हो रहा है। हमारे पी एम साहब द्वारा जबरदस्ती हाथ मिलाने और गले पड़ने / झप्पी लगाने के दृश्ये हम अक्सर टीवी चैनलों पर देखते रहते है कई बार उन्हे मजाक का पात्र् भी बनाया जाता है। लेकिन भारतीय नियंत्रित मीडिया ( Controlled Media )इन सबको भी तोड़ मरोड़ कर राजा के इस ठिठोलियेपन को भी सफल राजनीति / कूटनीति के रूप मे पेश करने मे अपनी शान
समझता है। सारे पड़ोसी देश एक समय मे हमारे अच्छे मित्र हुआ करते थे वो अब लगभग सभी शत्रु बन चुके है। चीन गलवान घाटी मे हमारी हज़ारो वर्ग किलोमीटर तक सामरीक महत्व की चोटियों पर कब्ज़ा जमा कर बैठा है। पाकिस्तान कितनी बार कश्मीर मे आतंकवादी हमले करवा चुका है। ईरान इजराइल अमेरिका युद्ध ने तो मानो हमारी पोल खोल कर हि रख् दी है। देश की जनता को ये लग रहा है की हम अब अमेरिका की कठपुतली बनते जा रहे है। रूस से तेल लेने की घटना यही साबित करती है। ईरान जैसे मित्र देश का हमें साथ देना चाहिए। साथ मे शक्ति और स्वाभिमान क्या होता है ये हमें ईरान से सीखना भी चाहिए। दुर्भाग्य से आज भारत पूरे विश्व मे अलग थलग पड़ा है। कभी कभी किसी देश के नेता के कूटनितिक बयान का सहरा लेकर अपने पक्ष मे इस्तेमाल करना भारत जैसे एक महान सम्प्रभु देश के लिए शोभा नही देता । we do not need certificates OR Permission to formulate our independent Foreign Policy. Its Our Sovereign Right & We must exercise it without anybody’s pressure OR fear, particularly USA.
अमेरिका पर हमारी अत्येधिक निर्भरता हमारे लिए सामरीक दृस्टि से घातक सिद्ध हो सकती है। यही समय है जब भारत को अपनी विदेश नीति का पुनरीक्षण करना चाहिए और स्वाभिमान को ऊंचा रखते हुए इंदिराजी के दिखाये मार्ग का अवलंबन करना चाहिए बजाये एक भ्रम और झूंटे दम्भ ( Fallacy ) मे रहने के। ये आत्मघाती साबित हो सकता हैं। ” Its high time India must HONESTLY introspect & Give a New, Clear & Strong direction to our Foreign Policy “. जबरदस्ती गले पड़ने की विदेशनीति से काम नही चलेगा “। गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर की ये पंक्तियाँ हमारा मार्गदर्शक होना चाहिए “”। रहो कर्म मे धीर, रहो धर्म मे धीर ,रहो उन्नत शिर डरो ना
