पंचांग के अनुसार 26 मार्च 2026 को अष्टमी तिथि सुबह 11 बजकर 47 मिनट तक रहेगी इसके बाद नवमी तिथि आरंभ हो जाएगी यही कारण है कि इस दिन दोनों तिथियों का विशेष संयोग बन रहा है चूंकि राम नवमी की पूजा परंपरागत रूप से मध्याह्न काल में की जाती है इसलिए 26 मार्च का दिन इस दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है ज्योतिष विद्वानों के अनुसार जब नवमी तिथि मध्याह्न में उपस्थित होती है तो उसी दिन राम नवमी मनाना अधिक शुभ माना जाता है
ऐसे में 26 मार्च को सुबह के समय अष्टमी की पूजा और कन्या पूजन करना उत्तम रहेगा इस दिन सुबह 6 बजकर 16 मिनट से 7 बजकर 48 मिनट तक का समय विशेष रूप से शुभ माना गया है इस दौरान माता की पूजा अर्चना और कन्या पूजन करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है इसके बाद नवमी तिथि शुरू होते ही भगवान श्रीराम की पूजा की जा सकती है
राम नवमी की पूजा का शुभ समय 26 मार्च को सुबह 11 बजकर 13 मिनट से दोपहर 1 बजकर 41 मिनट तक रहेगा इस अवधि में मध्याह्न का समय सबसे महत्वपूर्ण होता है जो लगभग 12 बजकर 27 मिनट पर आता है मान्यता है कि इसी समय भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था इसलिए इस समय पूजा करने का विशेष महत्व होता है
हालांकि कुछ लोग उदया तिथि को अधिक महत्व देते हैं ऐसे में वे 27 मार्च 2026 को राम नवमी मनाना उचित मानते हैं इस दिन भी नवमी तिथि सुबह 10 बजकर 6 मिनट तक रहेगी और पूजा का समय लगभग वही रहेगा जो 26 मार्च को है यानी सुबह 11 बजकर 13 मिनट से दोपहर 1 बजकर 41 मिनट तक पूजा की जा सकती है
कुल मिलाकर इस वर्ष अष्टमी और नवमी का संयोग एक ही दिन होने के कारण 26 मार्च का महत्व अधिक बढ़ गया है यही वजह है कि अधिकांश लोग इसी दिन दोनों पर्व मनाना पसंद करेंगे हालांकि परंपराओं और व्यक्तिगत मान्यताओं के अनुसार कुछ लोग 27 मार्च को भी राम नवमी मना सकते हैं
इस विशेष संयोग में सबसे जरूरी बात यह है कि पूजा पूरे श्रद्धा और विश्वास के साथ की जाए क्योंकि सच्ची भक्ति ही भगवान तक पहुंचने का सबसे सरल मार्ग है चाहे आप 26 मार्च को पूजा करें या 27 मार्च को यदि विधि विधान और आस्था के साथ आराधना की जाए तो निश्चित रूप से शुभ फल की प्राप्ति होती है
