यह कहानी शुरू होती है संजय लीला भंसाली की फिल्म देवदास से जब भंसाली एक नई और ताजा आवाज की तलाश में थे तभी उनकी नजर श्रेया घोषाल पर पड़ी उन्होंने श्रेया को फिल्म के एक खास गाने के लिए चुना जिसका नाम था बैरी पिया यह गाना फिल्म में ऐश्वर्या राय और शाहरुख खान पर फिल्माया गया था और इसकी धुन और भावनाओं को जीवंत करने के लिए एक मासूम लेकिन मजबूत आवाज की जरूरत थी
इस गाने से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा आज भी लोगों को हैरान कर देता है जब श्रेया पहली बार रिकॉर्डिंग स्टूडियो पहुंचीं तो उन्हें यह बताया गया कि यह सिर्फ एक तरह का ट्रायल या प्रैक्टिस सेशन है उन्होंने बिना किसी दबाव के हेडफोन लगाया और गाना शुरू कर दिया उनकी आवाज में सहजता और मासूमियत इतनी स्वाभाविक थी कि हर सुर दिल को छू रहा था बीच में जब वे रुकीं तो भंसाली ने उन्हें गाना जारी रखने को कहा और श्रेया ने बिना यह सोचे कि यह असली रिकॉर्डिंग है पूरा गाना गा दिया
स्टूडियो में मौजूद सभी लोग उस वक्त हैरान रह गए थे क्योंकि एक किशोरी की आवाज में इतनी परिपक्वता और भावनात्मक गहराई कम ही देखने को मिलती है खास बात यह रही कि जिस टेक को श्रेया केवल प्रैक्टिस समझकर गा रही थीं वही टेक इतना परफेक्ट निकला कि उसे ही फिल्म का फाइनल वर्जन बना दिया गया इस गाने में उनके साथ उदित नारायण की आवाज भी थी जिसने इस गीत को और भी खास बना दिया
जब फिल्म रिलीज हुई तो यह गाना लोगों के दिलों में बस गया और श्रेया घोषाल रातों रात एक बड़ा नाम बन गईं उनकी आवाज की मिठास और भावनाओं की सच्चाई ने उन्हें बाकी गायकों से अलग पहचान दिलाई सबसे बड़ी बात यह रही कि अपने पहले ही बॉलीवुड गाने के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया जो किसी भी नए कलाकार के लिए एक असाधारण उपलब्धि मानी जाती है
इस एक गाने ने श्रेया के करियर की दिशा पूरी तरह बदल दी इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक हिट गाने देकर खुद को बॉलीवुड की सबसे भरोसेमंद और प्रतिभाशाली गायिकाओं में शामिल कर लिया आज भी जब देवदास के गानों की बात होती है तो बैरी पिया सबसे पहले याद आता है और उसके पीछे होती है एक 16 साल की लड़की की वह आवाज जिसने बिना किसी दबाव के सिर्फ दिल से गाकर इतिहास रच दिया
