भारत के साथ हुई बातचीत में एस जयशंकर के साथ मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति और बदलते हालात पर चर्चा की गई। दोनों देशों ने आपसी रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और वैश्विक स्थिरता को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ बातचीत में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उस पर अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। अमेरिका ने इस दौरान वैश्विक सुरक्षा और परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने पर जोर दिया। साथ ही हैती में शांति बहाली के प्रयासों और वहां की स्थिति पर भी विचार साझा किए गए।
केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुटो के साथ हुई बातचीत में अमेरिका ने ईरान के मुद्दे पर केन्या के रुख की सराहना की। दोनों नेताओं ने खाड़ी देशों के खिलाफ ईरान की गतिविधियों की निंदा पर चर्चा की और क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इस दौरान अमेरिका ने हैती में शांति स्थापित करने के लिए केन्या के योगदान की भी सराहना की।
अमेरिका की यह पहल इस बात का संकेत है कि वह अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का समाधान ढूंढने की दिशा में काम कर रहा है। एशिया अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका के प्रमुख साझेदार देशों के साथ संवाद बढ़ाकर अमेरिका अपनी कूटनीतिक पकड़ को और मजबूत करना चाहता है।
यह कूटनीतिक सक्रियता दर्शाती है कि अमेरिका ईरान और मध्य पूर्व के मुद्दों को लेकर बेहद गंभीर है और वह अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर एक संयुक्त रणनीति के तहत आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है।
