मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि जीवनदीप आश्रम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि आशा करुणा और सेवा का प्रकाश स्तंभ बनेगा। यह आश्रम समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगा और मानवता की सेवा के लिए एक प्रेरणादायी केंद्र के रूप में स्थापित होगा। उन्होंने इस अवसर पर सनातन धर्म और जीवन दर्शन पुस्तक का विमोचन भी किया और कहा कि यह ग्रंथ समाज को सही दिशा देने में सहायक सिद्ध होगा।
कार्यक्रम में देश के अनेक संत और आध्यात्मिक गुरु उपस्थित रहे जिनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्र आनंद गिरि अवधेशानंद गिरि और साध्वी ऋतंभरा प्रमुख रूप से शामिल रहे। इसके साथ ही आरिफ मोहम्मद खान भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ 2028 की तैयारियों का उल्लेख करते हुए सभी संतों को उज्जैन आने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का वैश्विक मंच है। संतों की उपस्थिति इस आयोजन को और अधिक भव्य और दिव्य बनाएगी।
इस अवसर पर सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि आज विश्व के कई देशों की व्यवस्थाएं डगमगा रही हैं लेकिन सनातन धर्म और संस्कृति ने अनेक चुनौतियों के बावजूद अपनी गरिमा बनाए रखी है। उन्होंने कहा कि इसमें संतों और आश्रमों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है जो समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं।
साध्वी ऋतंभरा ने अपने संबोधन में कहा कि जीवनदीप आश्रम वृंदावन की आध्यात्मिक गरिमा को और बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में सबसे बड़ी बाधा बाहरी नहीं बल्कि आंतरिक होती है और यदि व्यक्ति मनसा वाचा कर्मणा पूर्ण समर्पण के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़े तो कोई भी शक्ति उसे सफलता प्राप्त करने से नहीं रोक सकती।
आरिफ मोहम्मद खान ने भारतीय संस्कृति की ज्ञान परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि जीवनदीप आश्रम भविष्य में ज्ञान के संरक्षण और संवर्धन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि हमारे संतजन सदैव जनकल्याण और समाज सेवा के लिए समर्पित रहे हैं और यह आश्रम भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाएगा।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि मध्यप्रदेश सरकार संत परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। जीवनदीप आश्रम का लोकार्पण इसी प्रयास की एक महत्वपूर्ण कड़ी है जो समाज में सेवा करुणा और आध्यात्मिकता के मूल्यों को सशक्त करेगा।
