इंदिरा ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि उनका रिश्ता सामान्य प्रक्रिया से नहीं बल्कि जल्दबाजी में तय हुआ। उनकी पहली मुलाकात से लेकर शादी तक का समय महज 17 दिन का था। वह उस समय वर्किंग महिला थीं और उन्हें भरोसा दिलाया गया कि शादी की सारी व्यवस्थाएं उनके पति संभाल लेंगे। इंदिरा कहती हैं कि शादी से पहले उज्जैन में पांच घंटे की मुलाकात और बातचीत के बाद शादी हुई और उन्हें लगा कि स्वयं खजराना गणेश जी की कृपा उनके ऊपर है।
हालात तब बदल गए जब पुनीत भट्ट के दत्तक पुत्र उदित की पत्नी गर्भवती हुई। इंदिरा का आरोप है कि संतान की चाह में ही उन्हें शादी के लिए चुना गया था। जुलाई 2025 में यह पुष्टि होने के बाद उनकी अहमियत परिवार के लिए खत्म हो गई। इंदिरा ने बताया कि उनके खिलाफ FIR उसी समय दर्ज करवाई गई जब बेटे के घर गर्भवती पत्नी के पेट में लात मारने का झूठा आरोप लगाया गया। 19 सितंबर 2025 को पुनीत भट्ट ने उन्हें आश्वासन दिया कि मामला संभाल लिया जाएगा। लेकिन अगले ही दिन घर पर ताला लगा हुआ मिला और उनके जेवर और नकद राशि भी ननद ने हड़प ली।
कहानी का नाटकीय मोड़ तब आया जब 29 दिसंबर को इंदिरा कार से जा रही थीं और पुनीत भट्ट ने बीच सड़क में उनकी गाड़ी रोककर तलाक की धमकी दी। इंदिरा ने बताया कि उनके पति ने माफी मांगी और कहा कि बस आपसी सहमति से तलाक दे दो।
दूसरी ओर पुनीत भट्ट ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि यह एक गहरी साजिश है और उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए बनाया गया मामला है। पुनीत ने बताया कि उनकी पहली पत्नी का निधन 2020 में हुआ और यह दूसरी शादी देवास निवासी रिश्तेदार के माध्यम से हुई। उन्होंने दावा किया कि शादी के बाद इंदिरा ने उनके साथ “साइकोलॉजिकल गेम” खेलना शुरू कर दिया और तलाक की पहल खुद इंदिरा ने की थी।
एसीपी खजराना कुंदन मंडलोई ने बताया कि जनसुनवाई में शिकायत प्राप्त हुई है जिसमें दावा किया गया कि पुनीत भट्ट ने दहेज के रूप में फॉर्च्यूनर कार और करीब एक करोड़ रुपये की मांग की थी। वहीं, इस महिला के खिलाफ पहले भी मारपीट का आरोप दर्ज किया जा चुका है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और सभी पक्षों के बयानों के आधार पर कार्रवाई करेगी। इस तरह खजराना मंदिर के पुजारी परिवार का विवाद अब सार्वजनिक हो गया है और मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
