नई दिल्ली। केदार जाधव एक ऐसे प्रतिभाशाली ऑलराउंडर रहे जिन्होंने अपने सीमित मौके का पूरा फायदा उठाते हुए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई। दाएं हाथ के मध्यक्रम के बल्लेबाज और दाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज के रूप में खेलते हुए जाधव का जन्म 26 मार्च 1985 को पुणे, महाराष्ट्र में हुआ था। उनका अनोखा गेंदबाजी एक्शन और आक्रामक बल्लेबाजी स्टाइल उन्हें भारतीय टीम में खास बनाता था। घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छे प्रदर्शन के बावजूद उन्हें 29 साल की उम्र में पहली बार भारतीय टीम में अवसर मिला। उन्होंने नवंबर 2014 में वनडे और जुलाई 2015 में टी20 में डेब्यू किया, जबकि टेस्ट में खेलने का मौका उन्हें कभी नहीं मिला।
वनडे फॉर्मेट में शानदार प्रदर्शन
केदार जाधव को टी20 में कम मौके मिले, लेकिन वनडे में उन्होंने 73 मैचों में अपनी छाप छोड़ी। इस दौरान उन्होंने 52 पारियों में 1,389 रन बनाए, औसत 42.09 और स्ट्राइक रेट 101.60 के साथ 2 शतक और 6 अर्धशतक लगाए। उनका सर्वोच्च स्कोर इंग्लैंड के खिलाफ 120 रन रहा, जिसमें 76 गेंदों में 12 चौके और 4 छक्के शामिल थे। इस पारी के दम पर भारत ने 351 रन का लक्ष्य 11 गेंद पहले 3 विकेट से हासिल किया। जाधव वनडे में भारतीय टीम के पहले खिलाड़ी हैं जिन्होंने छह नंबर या उससे नीचे बल्लेबाजी करते हुए 2 शतक बनाए। इसके अलावा उन्होंने वनडे में 27 विकेट भी लिए।
टी20 और आईपीएल में योगदान
जाधव ने 9 T20 मैच खेले और 6 पारियों में 1 अर्धशतक की मदद से 122 रन बनाए। उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच न्यूजीलैंड के खिलाफ ऑकलैंड में 8 फरवरी 2020 को हुआ। आईपीएल में जाधव ने दिल्ली डेयरडेविल्स, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु, चेन्नई सुपर किंग्स और सनराइजर्स हैदराबाद के लिए खेलते हुए 95 मैचों की 81 पारियों में 1,208 रन बनाए और 4 अर्धशतक जड़े। उनका आखिरी आईपीएल सीजन 2023 में रहा।
क्रिकेट से संन्यास और नई दिशा
3 जून 2024 को केदार जाधव ने क्रिकेट को अलविदा कहा। संन्यास लेने के बाद वह कमेंट्री और क्रिकेट विश्लेषण के क्षेत्र में करियर बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। उनके करियर ने सीमित अवसरों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन का परिचय दिया और युवा क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने।
