यह नई पहल फिलहाल भोपाल के हमीदिया अस्पताल में प्रयोग के तौर पर शुरू की गई थी जहां इसे लोगों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली जिसके बाद सरकार ने इसे पूरे प्रदेश में लागू करने का निर्णय लिया है इस मॉडल के तहत जन्म के तुरंत बाद अस्पताल द्वारा आवश्यक जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज की जाएगी और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होते ही प्रमाण पत्र सीधे परिजनों के मोबाइल पर भेज दिया जाएगा
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और तेज हो जाएगी अब तक जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए परिजनों को कई बार अस्पताल जाना पड़ता था आवेदन की स्थिति जानने के लिए अलग से प्रयास करने पड़ते थे और कई बार अनावश्यक देरी का सामना करना पड़ता था लेकिन इस डिजिटल मॉडल के लागू होने के बाद यह सभी समस्याएं खत्म हो जाएंगी और पूरी प्रक्रिया सरल और सुगम बन जाएगी
सरकार का मानना है कि इस पहल से विशेष रूप से नवजात शिशुओं के माता पिता को बड़ी राहत मिलेगी क्योंकि बच्चे के जन्म के बाद कई अन्य जिम्मेदारियों के बीच दस्तावेजी प्रक्रिया एक बड़ी चुनौती बन जाती थी अब यह काम बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के स्वतः पूरा हो जाएगा और प्रमाण पत्र समय पर उपलब्ध हो जाएगा
इसके साथ ही यह पहल डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी क्योंकि इससे सरकारी सेवाओं को तकनीक के माध्यम से सीधे नागरिकों तक पहुंचाने का उद्देश्य साकार होगा नई व्यवस्था लागू होने के बाद न केवल सरकारी बल्कि निजी अस्पतालों में भी जन्म पंजीकरण की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और प्रभावी हो जाएगी
यह कदम प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाने के साथ साथ नागरिकों के समय और संसाधनों की भी बचत करेगा साथ ही भ्रष्टाचार और अनावश्यक देरी जैसी समस्याओं पर भी अंकुश लगेगा कुल मिलाकर मध्यप्रदेश सरकार की यह पहल शासन व्यवस्था को आधुनिक और जनहितैषी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है अब देखना यह होगा कि इसे पूरे प्रदेश में कितनी तेजी और प्रभावशीलता के साथ लागू किया जाता है और आम लोगों को इसका कितना लाभ मिल पाता है
