समरथ मौर्य नाम के इस व्यक्ति ने अपनी तीनों प्रेमिकाओं के साथ जनजातीय रीति रिवाजों के अनुसार विवाह किया। यह विवाह एक दिन का नहीं बल्कि पूरे तीन दिनों तक चलने वाला आयोजन था जिसमें गांव के सैकड़ों लोग शामिल हुए और इस अनोखे पल के गवाह बने। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इस शादी में उनके छह बच्चे भी शामिल हुए जिन्होंने अपने पिता की बारात में जमकर नृत्य किया और इस आयोजन को एक अलग ही रंग दे दिया।
बताया जाता है कि समरथ मौर्य का अपनी पहली प्रेमिका के साथ रिश्ता साल 2003 से जुड़ा हुआ था और समय के साथ बाकी दो महिलाएं भी उनके जीवन का हिस्सा बन गईं। पिछले करीब 15 वर्षों से ये सभी एक साथ लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे थे और एक परिवार की तरह जीवन बिता रहे थे। लंबे समय तक बिना शादी के साथ रहने के बाद आखिरकार उन्होंने सामाजिक मान्यता और पारिवारिक पहचान के लिए विवाह करने का निर्णय लिया।
इस फैसले के पीछे दो मुख्य कारण सामने आए हैं। पहला यह कि उनके बच्चों को समाज में किसी तरह की असहज स्थिति का सामना न करना पड़े और उन्हें एक स्पष्ट पहचान मिल सके। दूसरा कारण जनजातीय परंपराओं से जुड़ा हुआ है जहां किसी भी धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए विवाहित होना आवश्यक माना जाता है। ऐसे में इस परिवार ने अपने रिश्ते को औपचारिक रूप देने का रास्ता चुना।
इस अनोखी शादी को लेकर कानूनी पहलुओं पर भी चर्चा तेज हो गई है। सामान्य परिस्थितियों में एक से अधिक विवाह भारतीय कानून के तहत मान्य नहीं होते लेकिन जनजातीय समुदायों को उनके पारंपरिक रीति रिवाजों के अनुसार कुछ विशेष छूट दी गई है। इसी वजह से यह विवाह उस समाज की परंपराओं के अंतर्गत वैध माना जा रहा है।
सोशल मीडिया पर इस शादी की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। कोई इसे प्रेम और जिम्मेदारी का उदाहरण बता रहा है तो कोई इसे सामाजिक मान्यताओं के खिलाफ मानकर सवाल उठा रहा है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम ने एक बात साफ कर दी है कि भारत के अलग अलग हिस्सों में परंपराएं और सामाजिक संरचनाएं आज भी विविधता से भरी हुई हैं जहां रिश्तों को देखने का नजरिया भी अलग अलग हो सकता है।
यह शादी अब सिर्फ एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं रही बल्कि एक ऐसी कहानी बन गई है जो यह दिखाती है कि बदलते समय के बीच भी परंपराएं किस तरह लोगों के जीवन को प्रभावित करती हैं और कैसे लोग अपने हालात और सामाजिक जरूरतों के अनुसार फैसले लेते हैं।
