दुबई मीडिया ऑफिस के अनुसार आपातकालीन टीमों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए स्थिति को नियंत्रण में कर लिया। टैंकर में आग जरूर लगी थी लेकिन उसे समय रहते बुझा दिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि न तो कोई व्यक्ति घायल हुआ और न ही समुद्र में तेल का रिसाव हुआ।
इस घटना से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी कि यदि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज को दोबारा नहीं खोला गया तो अमेरिका ईरान की तेल सुविधाओं को निशाना बना सकता है। ट्रंप की इस चेतावनी के बाद ही टैंकर पर हमले की खबर सामने आई जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक कुवैत का यह टैंकर दुबई से करीब 31 नॉटिकल मील उत्तर-पश्चिम में हमले का शिकार हुआ। ब्रिटेन की मैरीटाइम एजेंसी के अनुसार हमले के बाद जहाज में आग लग गई थी जिसे बाद में काबू में कर लिया गया।
इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटना को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि नागरिक बुनियादी ढांचे जैसे तेल टैंकरों पर हमला करना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत गंभीर अपराध माना जा सकता है।
दूसरी ओर चीन ने इस पूरे घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए अमेरिका और इजरायल से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील की है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सभी पक्ष संयम बरतें और क्षेत्र में शांति बनाए रखने का प्रयास करें।
चीन ने संघर्ष के दौरान ईरान के परमाणु संयंत्रों और ऐतिहासिक स्थलों को हुए नुकसान पर भी दुख जताया है। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि सांस्कृतिक धरोहर पूरी मानवता की अमूल्य संपत्ति है और इस तरह का नुकसान बेहद चिंताजनक है।
कुल मिलाकर मिडिल ईस्ट में बढ़ते इस तनाव ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार को गंभीर जोखिम में डाल दिया है। होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग पर पहले से मौजूद संकट के बीच इस तरह के हमले आने वाले दिनों में हालात को और जटिल बना सकते हैं।
