राजगढ़ । मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के सारंगपुर क्षेत्र में गुरुवार सुबह भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष जितेंद्र मालवीय उर्फ हाथिया पर जानलेवा हमला कर दिया गया। करीब 7:30 बजे हुए इस हमले में दो लोगों ने उन पर कुल्हाड़ी और डंडों से वार किए, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई। घायल नेता, जो सुल्तानिया गांव के सरपंच भी हैं, घटना के बाद गंभीर हालत में पचोर थाने पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि यह हमला गौतम टेटवाल के इशारे पर कराया गया।
अतिक्रमण विवाद बना हमले की वजह
बताया जा रहा है कि सुल्तानिया पंचायत में दो दिन पहले अतिक्रमण हटाने को लेकर विवाद हुआ था। इसी के बाद यह हिंसक घटना सामने आई। वहीं दूसरे पक्ष का कहना है कि सरपंच ने उन पर ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश की, जिसके बाद विवाद बढ़ा। पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत के आधार पर क्रॉस एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सरपंच ने लगाए गंभीर आरोप
सरपंच ने लगाए गंभीर आरोप
जितेंद्र मालवीय ने आरोप लगाया कि मंत्री गौतम टेटवाल ने जाति बदलकर चुनाव लड़ा, जिसकी शिकायत उन्होंने निर्वाचन आयोग और हाईकोर्ट में की है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मंत्री ने मामला वापस लेने के लिए 70 से 80 लाख रुपए देने का प्रस्ताव दिया था। सरपंच के अनुसार, वे सुबह ट्रैक्टर से कचरा फेंकने गए थे, तभी कैलाश नागर और दुर्गाप्रसाद नागर ने उन पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया और अन्य लोगों ने भी मारपीट की।
मंत्री ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
वहीं गौतम टेटवाल ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनका इस घटना से कोई संबंध नहीं है। उनके मुताबिक, यह आपसी विवाद है और पब्लिसिटी के लिए उन पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं।
दूसरे पक्ष ने भी लगाए आरोप
दूसरे पक्ष के कैलाश नागर और दुर्गाप्रसाद भी घायल हुए हैं। उनका कहना है कि वे खेत पर काम कर रहे थे, तभी सरपंच ने ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश की। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग आए और उनके साथ मारपीट की।
पुलिस जांच में जुटी
पुलिस जांच में जुटी
थाना प्रभारी शकुंतला बामनिया के अनुसार, सरपंच की हालत गंभीर है। उनके बयान के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मारपीट और जानलेवा हमले का मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच की जा रही है। बताया गया कि 30 मार्च को पचोर तहसीलदार की मौजूदगी में सात पटवारियों की टीम ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी। यह कार्रवाई सरपंच के आवेदन पर की गई थी, जिससे आरोपी पक्ष नाराज था।
