जांच एजेंसियों के अनुसार राजीव लोचन सोनी ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारतीय स्टेट बैंक से करीब 13 करोड़ रुपए का लोन हासिल किया था यह लोन वर्ष 2006 से 2011 के बीच कंपनी के नाम पर लिया गया था आरोप है कि लोन लेने के दौरान दस्तावेजों में गलत जानकारी दी गई और नियमों का उल्लंघन किया गया बाद में यह लोन खाता एनपीए घोषित हो गया जिससे बैंक को भारी आर्थिक नुकसान हुआ
मामले की शुरुआत तब हुई जब बैंक ने अपने स्तर पर खाते की समीक्षा की और अनियमितताएं सामने आईं इसके बाद वर्ष 2022 में एसबीआई के क्षेत्रीय प्रबंधक ने इस पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई जिसके आधार पर सीबीआई ने केस दर्ज कर जांच शुरू की जांच के दौरान कई अहम तथ्य सामने आए जिनसे यह स्पष्ट हुआ कि लोन प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी की गई थी
सीबीआई ने इस मामले में राजीव लोचन सोनी के अलावा विजय सोनी और जगदीश चन्द्र सारंग को भी आरोपी बनाया है हालांकि फिलहाल राजीव लोचन की गिरफ्तारी हो चुकी है जबकि अन्य दोनों आरोपी अभी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है जांच एजेंसी संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा
गिरफ्तारी के बाद राजीव लोचन सोनी से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस घोटाले में और कौन लोग शामिल थे और किस स्तर पर मिलीभगत हुई थी ऐसे मामलों में अक्सर कई स्तरों पर साजिश और सहयोग की परतें सामने आती हैं इसलिए जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है
यह मामला सिर्फ एक कंपनी या व्यक्ति तक सीमित नहीं है बल्कि यह पूरे वित्तीय तंत्र के लिए चेतावनी है कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे बड़े लोन हासिल करना और फिर उसे चुकाए बिना छोड़ देना किस तरह बैंकिंग व्यवस्था को नुकसान पहुंचाता है ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई ही भविष्य में इस तरह के अपराधों पर रोक लगा सकती है
सीबीआई की यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि आर्थिक अपराधों के खिलाफ एजेंसियां सक्रिय हैं और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं जो इस घोटाले की परतें और खोल सकते हैं
