– प्रद्युम्न शर्मा मध्यप्रदेश शासन द्वारा हाल ही में ग्राम पंचायत सचिवों से संबंधित नियम अधिसूचित किए गए हैं। मध्यप्रदेश पंचायत सेवा ( ग्राम पंचायत सचिव भर्ती, अनुशासन और सेवा की शर्तें ) नियम, 2026 के नाम से प्रकाशित इन नियमों को पूर्ववर्ती मध्यप्रदेश पंचायत सेवा ( ग्राम पंचायत सचिव भर्ती और सेवा की शर्तें ) नियम, 2011 को निरस्त कर जारी किया गया है।
अधिसूचित नये नियम पूर्ववर्ती नियम के क्रियान्वयन से प्राप्त अनुभवों, ग्राम पंचायत सचिवों की वर्तमान भूमिका और पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज के परिदृश्य को दृष्टि में रखकर बनाए गए हैं।
ग्राम पंचायत सचिव का पद पंचायत राज प्रणाली का एक महत्वपूर्ण पद है। मध्यप्रदेश ग्राम पंचायत ( सचिव की शक्तियाँ तथा कृत्य ) नियम, 1999 के अनुसार ग्राम पंचायत के साधारण अधीक्षण तथा नियंत्रण के अधीन ग्राम पंचायत सचिव को 17 प्रकार की कार्यपालक शक्तियाँ, 42 प्रकार के गैर-वित्तीय पदीय कर्त्तव्य तथा 24 प्रकार के वित्तीय तथा कराधान संबंधी कर्त्तव्य सौंपे गए हैं। इसी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि पंचायत राज व्यवस्था में ग्राम पंचायत सचिव की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। ग्राम पंचायत सचिव की भूमिका को देखते हुए ही उसकी भर्ती की पद्धति, अनुशासन एवं नियंत्रण, प्रशिक्षण , सेवा संबंधी अभिलेखों का संधारण तथा अवकाश आदि के प्रचलित नियमों ,आदेशों व निर्देशों को पुनरीक्षित कर नये नियम अधिसूचित किए गए हैं।
ग्राम रोजगार सहायकों का कोटा – नये नियमों में ग्राम पंचायत सचिव के पद पर भर्ती हेतु ग्राम रोजगार सहायकों का पचास प्रतिशत कोटा निर्धारित किया गया है। इससे एक तरफ सरकार को ग्राम पंचायत स्तर पर पूर्व से कार्य करने वाले अनुभवी अभ्यर्थी सचिव के पद हेतु मिल सकेंगे वहीं दूसरी ओर ग्राम रोजगार सहायकों को उच्चतर पद पर कार्य करने का अवसर मिल सकेगा।
भर्ती मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा- नये नियमों के अनुसार ग्राम पंचायत सचिव के पद हेतु मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल पात्रता परीक्षा आयोजित करेगा। पूर्व के नियमों में यह भर्ती मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत द्वारा अभ्यर्थी के हायर सैकेंड्री परीक्षा में प्राप्त अंकों की प्रतिशतता की मेरिट सूची के आधार पर की जाना प्रावधानित था। अब शैक्षणिक अर्हता स्नातक एवं कंप्युटर संबंधी होगी । यद्यपि नियुक्तिकर्ता प्राधिकारी पूर्ववत मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत ही है।
प्रशिक्षण- भर्ती किए गए सचिवों के उन्मुखीकरण एवं आधारभूत प्रशिक्षण आयोजित करने की जिम्मेदारी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत को सौंपी गई है। प्रशिक्षण को परिवीक्षा अवधि की समाप्ति से जोड़ा गया है। नवनियुक्त सचिवों के लिए दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि प्रावधानित की गई है।
नियंत्रण -पूर्व के नियमों में प्रावधान था कि ग्राम पंचायत सचिव, ग्राम पंचायत के प्रशासकीय नियंत्रण के अधीन होगा। नये नियमों में इसे अपने क्रियाकलापों के लिए ग्राम पंचायत के प्रति उत्तरदायी ठहराया गया है साथ ही उसे मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत के माध्यम से जनपद पंचायत के प्रशासनिक नियंत्रण में भी रखा गया है।
सेवा संबंधी अभिलेखों का संधारण जनपद-पंचायत स्तर पर – सचिव के सेवा -अभिलेख अब जनपद पंचायत के कार्यालय में रखे जाएंगे जबकि पूर्व के नियमानुसार ऐसे अभिलेख जिला पंचायत के कार्यालय में रखा जाना प्रावधानित था।
अवकाश – पूर्व में ग्राम पंचायत सचिव को आकस्मिक अवकाश ग्राम पंचायत द्वारा स्वीकृत किया जाता था, नये नियमों में यह अधिकार सरपंच को दिया गया है । इस प्रकार आकस्मिक अवकाश स्वीकृति की प्रक्रिया का सरलीकरण हुआ है। नये नियमों में महिला सचिव को एक कैलेंडर वर्ष में बीस दिनों के आकस्मिक अवकाश की पात्रता निर्धारित की गई है जबकि पूर्व में महिला सचिवों को भी तेरह दिनों के आकस्मिक अवकाश की पात्रता थी। प्रसूति ,पितृत्व और चिकित्सा अवकाश का भी प्रावधान नये नियमों में किया गया है।
वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन- सचिव के कार्य-निष्पादन, आचरण आदि के मूल्यांकन का वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन संधारित करने की प्रणाली को नियमों में शामिल किया गया है जबकि पूर्व में यह प्रणाली प्रशासकीय निर्देशों द्वारा निर्धारित थी। इस प्रतिवेदन में प्रथम मतांकन सरपंच ग्राम पंचायत द्वारा किया जाएगा।
मध्यप्रदेश पंचायत सेवा ( ग्राम पंचायत सचिव भर्ती, अनुशासन और सेवा की शर्तें ) नियम, 1026 प्रवृत्त हो गए हैं । इन नियमों के नियम 11 (1) (पांच) में उल्लिखित है कि इन नियमों की अधिसूचना जारी होते ही, राज्य सरकार द्वारा प्रथम बार की भर्ती के लिए रिक्त पदों की सूचना भेजने, आरक्षण रोस्टर अद्यतन तैयार करने और मांगपत्र मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल को भेजने संबंधी अन्य गतिविधियों को संपन्न करने के लिए समय-सीमाएं अधिसूचित की जाएगी । ऐसी अधिसूचना जारी करना और उसके क्रियान्वयन को चुनौती के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए। प्रदेश के बेरोजगारों को हजारों की संख्या में रिक्त ग्राम पंचायत सचिव के पदों पर नियुक्ति हेतु आवेदन करने के परिप्रेक्ष्य में इस अधिसूचना का इन्तज़ार रहेगा। साथ ही वर्तमान में जिला पंचायत कार्यालयों में संधारित सचिवों के सेवा अभिलेखों को सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से जनपद पंचायतों के कार्यालयों को हस्तांतरित करना भी एक बड़ा कार्य है, जिसके लिए भी समय-सीमा तय करने के साथ आवश्यक अधोसंरचना जनपद पंचायतों को उपलब्ध कराई जानी चाहिए। यद्यपि इन सेवा अभिलेखों का डिजिटाइजेशन कराना बेहतर विकल्प है।
( लेखक पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सेवानिवृत्त अतिरिक्त संचालक हैं )
