सबसे पहला मामला बिजावर सीट की भाजपा विधायक आशा रानी सिंह का है। वर्ष 2011 में छतरपुर जिले की बिजावर सीट से विधायक आशा रानी सिंह को अपनी नौकरानी तिजिया बाई को आत्महत्या के लिए उकसाने के जुर्म में दस साल की सजा सुनाई गई। उनके पति पर भी इसी मामले में आरोप था। सजा के बाद विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता समाप्त कर दी और सीट को रिक्त घोषित कर चुनाव आयोग को सूचना भेजी। हाई कोर्ट में अपील करने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली और 31 अक्टूबर 2013 को उनकी विधायकी समाप्त हो गई।
दूसरा मामला पवई सीट के भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी का है। 2014 में अवैध रेत उत्खनन के दौरान तहसीलदार के साथ मारपीट के मामले में 31 अक्टूबर 2019 को भोपाल की विशेष अदालत ने उन्हें दो साल की सजा सुनाई। विधानसभा सचिवालय ने सदस्यता रद्द की अधिसूचना जारी की, लेकिन प्रहलाद लोधी ने हाई कोर्ट में अपील की और सात नवंबर 2019 को कोर्ट ने उनकी सजा पर स्टे दे दी। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों के बाद उनकी सदस्यता बहाल हुई और वे विधायक बने रहे।
तीसरा मामला खरगापुर विधानसभा सीट के राहुल सिंह लोधी का है। 2018 में उनके खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी ने चुनाव याचिका दायर की। हाई कोर्ट ने नामांकन पत्र में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने के आधार पर उनके निर्वाचन को शून्य घोषित कर दिया। विधानसभा सचिवालय ने सदस्यता समाप्त कर दी और सीट रिक्त घोषित की। राहुल सिंह लोधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की और दिसंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम स्टे दे कर सदस्यता बहाल की। लेकिन उन्हें वोटिंग और कुछ भत्तों का अधिकार नहीं मिला।
चौथा मामला विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा का है। उन्हें नामांकन पत्र में आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाने का आरोप लगा और मार्च 2026 में हाई कोर्ट ने उनके चुनाव को शून्य घोषित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें विधायक के तौर पर काम करने की अनुमति दी लेकिन वे वेतन, भत्तों और वोटिंग में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। उनकी सुनवाई 23 जुलाई को होगी।
पांचवां और वर्तमान में चर्चित मामला दतिया सीट के कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती का है। 2 अप्रैल 2026 को दिल्ली की विशेष अदालत ने उन्हें साल 1998 के बैंक धोखाधड़ी मामले में दोषी पाया और तीन साल की जेल की सजा सुनाई। सदस्यता समाप्त करने और सीट रिक्त घोषित करने की अधिसूचना विधानसभा सचिवालय ने चुनाव आयोग को भेज दी। राजेंद्र भारती ने जमानत तो पा ली है लेकिन सजा पर कनविक्शन स्टे नहीं मिला है। वे सुप्रीम कोर्ट में अपील करने जा रहे हैं।
राजेन्द्र कुमार सिंह ने इस घटनाक्रम पर कहा कि न्यायालय का काम अलग है, लेकिन रात में विधानसभा खोलकर गजट नोटिफिकेशन जारी करना संसदीय प्रक्रिया में पहले कभी नहीं हुआ। कई मामलों में हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद सदस्यता बहाल की जाती है। इन घटनाओं ने मध्य प्रदेश विधानसभा की राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया के बीच संवेदनशील संतुलन को उजागर किया है।
