प्रदेश के अन्य संभागों में यह प्रक्रिया 15 अप्रैल से शुरू होगी जिससे पूरे राज्य में चरणबद्ध तरीके से खरीदी सुनिश्चित की जा सके। इस बार गेहूं उपार्जन के लिए किसानों ने बड़े पैमाने पर पंजीयन कराया है। आंकड़ों के अनुसार लगभग 19 लाख 4 हजार 644 किसानों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है जो इस बात का संकेत है कि इस बार खरीदी का दायरा और भी व्यापक रहने वाला है।
राज्य सरकार ने भी इस बार व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। पूरे मध्यप्रदेश में कुल 3627 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं जहां किसानों से गेहूं की खरीदी की जाएगी। अनुमान है कि इस सीजन में करीब 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जाएगा। इसके लिए बारदाने की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई है और अतिरिक्त बारदाना खरीदने की प्रक्रिया भी तेजी से जारी है ताकि कहीं कोई कमी न रह जाए।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि उपार्जन केंद्रों पर किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो इसके लिए सभी जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं। बिजली पानी बैठने की व्यवस्था छाया प्रसाधन और पार्किंग जैसी सुविधाएं हर केंद्र पर उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसानों को लंबी कतारों में न खड़ा रहना पड़े और उनकी उपज का तौल समय पर हो सके।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि खरीदी शुरू होने से पहले सभी केंद्रों का गहन निरीक्षण किया जाए और तौल कांटों की सटीकता को लेकर किसी भी तरह की शिकायत की गुंजाइश न रहे। साथ ही यह भी कहा गया है कि किसानों के खातों में भुगतान समय पर और पारदर्शी तरीके से किया जाए ताकि उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने किसानों की स्थिति को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि किसान पहले से ही कई समस्याओं का सामना कर रहा है ऐसे में सरकार को और संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए।
कुल मिलाकर देखा जाए तो मध्यप्रदेश में इस बार गेहूं खरीदी को लेकर प्रशासन पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है और कोशिश की जा रही है कि किसानों को अधिकतम सुविधा और न्यूनतम परेशानी के साथ उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके। यह खरीदी अभियान न केवल किसानों की आय को मजबूत करेगा बल्कि राज्य की कृषि व्यवस्था को भी नई दिशा देगा।
