मैच के शुरुआती चरण में चेन्नई सुपर किंग्स मुकाबले में बनी हुई थी। 13 से 14 ओवर तक स्थिति ऐसी थी कि टीम वापसी कर सकती थी और आरसीबी को एक काबू में रहने वाले स्कोर तक रोक सकती थी। हालांकि फील्डिंग में ढिलाई और पावरप्ले में विकेट न मिलना पहले ही टीम पर दबाव बना चुका था लेकिन असली झटका बाद में लगा।
जब टिम डेविड क्रीज पर आए तो शुरुआत में वह संघर्ष करते नजर आए। उनकी पहली कुछ गेंदों पर रन नहीं बन रहे थे और ऐसा लग रहा था कि सीएसके उन्हें जल्दी पवेलियन भेज देगी। इसी दौरान 18वें ओवर में तेज गेंदबाज अंशुल कंबोज ने एक शानदार गेंद डाली जिस पर टिम डेविड बोल्ड हो गए। उस पल ऐसा लगा कि चेन्नई ने मैच में बड़ी सफलता हासिल कर ली है।
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। थर्ड अंपायर ने जांच के बाद पाया कि यह गेंद नो बॉल थी क्योंकि गेंदबाज का पैर क्रीज से बाहर था। यह फैसला मैच का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। टिम डेविड को न सिर्फ जीवनदान मिला बल्कि उन्हें फ्री हिट का फायदा भी मिला जिसे उन्होंने छक्के में बदल दिया।
इसके बाद मैच पूरी तरह बदल गया। आत्मविश्वास से भर चुके टिम डेविड ने अगले ओवर में आक्रामक रुख अपनाया और गेंदबाजों पर हमला बोल दिया। खासकर 19वें ओवर में उन्होंने जिमी ओवरटन के खिलाफ जबरदस्त बल्लेबाजी करते हुए 30 रन बटोर लिए। यह ओवर ही सीएसके की उम्मीदों पर भारी पड़ गया और आरसीबी का स्कोर तेजी से 250 के पार पहुंच गया।
अगर उस समय नो बॉल नहीं होती तो संभव था कि आरसीबी 220 से 230 रन के आसपास सिमट जाती। ऐसे में चेन्नई के बल्लेबाजों पर दबाव कम होता और मैच का नतीजा कुछ अलग हो सकता था। लेकिन क्रिकेट में छोटे-छोटे पल ही बड़े नतीजों को तय करते हैं और इस मैच में भी ऐसा ही देखने को मिला।
मैच के बाद कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ ने भी इस बात को स्वीकार किया कि वह नो बॉल टीम के लिए भारी पड़ी। उन्होंने माना कि टिम डेविड का विकेट लगभग मिल चुका था लेकिन उस एक गलती के बाद उन्होंने पूरे मैदान पर दबदबा बना लिया।
आखिरकार यह मुकाबला इस बात का उदाहरण बन गया कि क्रिकेट में एक छोटी सी चूक किस तरह पूरे मैच की कहानी बदल सकती है। टिम डेविड ने मिले मौके को भुनाया और सीएसके को ऐसी हार दी जो लंबे समय तक याद रखी जाएगी।
