‘ओम’ की ध्वनि में छिपा है कंपन का विज्ञान
‘ओम’ दरअसल ‘अ+उ+म’ का संयोग है, जिसे Om (mantra) या प्रणव भी कहा जाता है। जब इसका लंबा और गहरा उच्चारण किया जाता है, तो शरीर में सूक्ष्म कंपन उत्पन्न होते हैं। ये कंपन सीधे Nervous System पर असर डालते हैं। इससे दिमाग शांत होता है, तनाव कम होता है और एकाग्रता बढ़ती है। यही कारण है कि ध्यान और योग में ‘ओम’ को विशेष महत्व दिया गया है।
सात चक्रों पर पड़ता है गहरा प्रभाव
मानव शरीर में सात प्रमुख ऊर्जा केंद्र यानी चक्र माने जाते हैं—मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्ध, आज्ञा और सहस्रार। ‘ओम’ के उच्चारण से उत्पन्न कंपन इन चक्रों को सक्रिय करने में मदद करते हैं। इससे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह संतुलित होता है और व्यक्ति मानसिक व शारीरिक रूप से स्थिर महसूस करता है। नियमित अभ्यास से यह संतुलन लंबे समय तक बना रहता है।
वैज्ञानिक शोध भी करते हैं पुष्टि
National Library of Medicine में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, ‘ओम’ का जाप ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। इस शोध में पाया गया कि सिर्फ 5 मिनट के जाप से ही हार्ट रेट वेरिएबिलिटी में सुधार हुआ और तनाव के स्तर में कमी आई। यह तंत्र शरीर की अनैच्छिक क्रियाओं जैसे दिल की धड़कन और सांस को नियंत्रित करता है, इसलिए इसका संतुलन बेहद जरूरी है।
वेगस नर्व को करता है मजबूत
विशेषज्ञों के अनुसार, ‘ओम’ का उच्चारण Vagus Nerve को सक्रिय करता है। यह नर्व दिल, फेफड़ों और पाचन तंत्र को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। जब ‘ओम’ का जाप गहरी सांस के साथ किया जाता है, तो यह नर्व उत्तेजित होती है, जिससे तनाव कम होता है, सांस लेने की क्षमता बेहतर होती है और शरीर में शांति का अनुभव होता है।
मानसिक स्वास्थ्य और याददाश्त में सुधार
‘ओम’ की ध्वनि न केवल चक्रों को सक्रिय करती है, बल्कि मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को भी उत्तेजित करती है। इससे एकाग्रता, याददाश्त और मानसिक स्पष्टता बढ़ती है। नियमित अभ्यास से चिंता, तनाव और नींद से जुड़ी समस्याएं भी कम हो सकती हैं। यही वजह है कि आजकल मानसिक स्वास्थ्य सुधारने के लिए भी इसे एक आसान और प्रभावी तकनीक माना जा रहा है।
कैसे करें सही तरीके से ‘ओम’ का जाप?
‘ओम’ का सही लाभ पाने के लिए इसे सुबह खाली पेट या ध्यान के समय करना सबसे अच्छा माना जाता है। इसके लिए आराम से बैठकर गहरी सांस लें और धीरे-धीरे लंबा ‘ओम’ उच्चारित करें। फिर सांस को धीरे-धीरे छोड़ें। ध्यान रखें कि उच्चारण जितना लंबा और गहरा होगा, उतना ही अधिक कंपन पैदा होगा और लाभ भी बढ़ेगा।
आध्यात्म और विज्ञान का अनोखा संगम
‘ओम’ केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी शरीर और मन को संतुलित करने का प्रभावी माध्यम है। नियमित अभ्यास से न केवल चक्र सक्रिय होते हैं, बल्कि न्यूरॉन्स भी जागृत होते हैं, जिससे जीवन में शांति, स्थिरता और सकारात्मकता आती है।
