मामला हनुमना थाना क्षेत्र से जुड़ा है जहां एक ड्राइवर को लेकर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि थाना प्रभारी अनिल काकडे के निजी वाहन चालक राजेश साकेत न केवल गाड़ी चलाते हैं बल्कि कई मामलों में गवाह के रूप में भी पेश किए जाते हैं। आरोप है कि पिछले आठ महीनों में वह 48 से अधिक मामलों में गवाही दे चुके हैं जिससे यह सवाल उठता है कि क्या वह हर घटना के प्रत्यक्षदर्शी हो सकते हैं।
सबसे हैरान करने वाली बात 28 मार्च 2026 की बताई जा रही है जब राजेश साकेत और एक अन्य व्यक्ति सूर्यमणि मिश्रा ने एक ही दिन में छह अलग अलग मामलों में गवाही दी। ये सभी मामले हनुमना थाना हाटा चौकी और पिपराही चौकी क्षेत्र से जुड़े थे जो लगभग 50 किलोमीटर के दायरे में फैले हुए हैं। इस तरह की घटनाओं ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया है।
आंकड़ों के अनुसार सूर्यमणि मिश्रा राजेश साकेत और पुष्पराज द्विवेदी जैसे कुछ नाम ऐसे हैं जो सैकड़ों मामलों में गवाह के रूप में सामने आए हैं। आरोप है कि ये लोग लूट डकैती मारपीट और नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में भी गवाही देते रहे हैं। हालांकि जब उनसे इस बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने जानकारी होने से ही इनकार कर दिया जिससे संदेह और गहरा गया है।
इस पूरे मामले में थाना प्रभारी अनिल काकडे की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। उन पर पहले भी एक गंभीर मामले में जांच चलने की बात सामने आई है जिसमें हत्या के केस को आत्महत्या बताने का प्रयास किया गया था। बावजूद इसके उन्हें जिम्मेदारी सौंपी गई जो प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।
देश की शीर्ष अदालत भारत का सर्वोच्च न्यायालय भी इस तरह के फिक्स गवाहों पर सख्त टिप्पणी कर चुकी है और इसे न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया गया है। साथ ही Madhya Pradesh High Court के निर्देश पर एक उच्च स्तरीय समिति का गठन भी किया गया है लेकिन इसके बावजूद इस तरह के मामले सामने आना चिंता का विषय है। वहीं इस मामले पर जब प्रभारी मंत्री लखन पटेल से सवाल किया गया तो उन्होंने जांच कराने की बात कही लेकिन इससे लोगों की चिंता कम नहीं हुई है।
यह पूरा मामला केवल एक जिले तक सीमित नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। यदि गवाह ही संदिग्ध हों तो न्याय की नींव कमजोर पड़ जाती है और असली अपराधियों के बच निकलने का खतरा बढ़ जाता है। अब जरूरत है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि कानून पर लोगों का भरोसा बना रहे।
