कुर्सी योग क्या है और क्यों जरूरी
कुर्सी योग में योगासन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास कुर्सी पर बैठकर या कुर्सी का सहारा लेकर किया जाता है। इसके लिए सिर्फ एक मजबूत और स्थिर कुर्सी की जरूरत पड़ती है। इसे घर पर, पार्क में या किसी सुरक्षित जगह पर आसानी से किया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह उन लोगों के लिए सुलभ और जोखिम-मुक्त विकल्प है, जिन्हें पारंपरिक योग करना मुश्किल लगता है। नियमित अभ्यास से बुजुर्ग अपनी शारीरिक क्षमता बढ़ा सकते हैं और मानसिक रूप से भी स्वस्थ और प्रसन्न रह सकते हैं।
कुर्सी योग के लाभ
कुर्सी योग में कंधे और गर्दन की स्ट्रेचिंग, पैरों की गतिविधियां और सहारे के साथ खड़े होकर किए जाने वाले आसन शामिल होते हैं। ये आसान अभ्यास पारंपरिक योग के जोखिम को कम करते हैं।
नियमित अभ्यास के फायदे:
जोड़ों की जकड़न कम होती है और मांसपेशियां मजबूत बनती हैं।
शरीर में लचीलापन बढ़ता है।
प्राणायाम की तकनीक से तनाव और चिंता कम होती है, मानसिक शांति मिलती है।
हृदय स्वास्थ्य बेहतर होता है और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है।
नींद की गुणवत्ता बढ़ती है। इस प्रकार बुजुर्ग डर या चोट की चिंता किए बिना अपनी शारीरिक क्षमता और संतुलन बनाए रख सकते हैं।
अभ्यास की शुरुआत और समय
आयुष मंत्रालय के अनुसार कुर्सी योग की शुरुआत सरल आसनों से करनी चाहिए। विशेषज्ञों का सुझाव है कि प्रशिक्षित योग शिक्षक की देखरेख में इसे शुरू करना बेहतर रहता है। सप्ताह में दो-तीन बार, 20 से 30 मिनट का अभ्यास भी काफी फायदेमंद साबित होता है। अभ्यास धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है और शरीर की क्षमता के अनुसार चुनिंदा आसनों पर ध्यान दिया जा सकता है।
कुर्सी योग करते समय सावधानियां
कुर्सी योग करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है:
बिना पहियों वाली मजबूत कुर्सी चुनें।
कुर्सी की सीट ज्यादा गद्देदार न हो और पीठ सीधी हो।
कुर्सी की ऊंचाई ऐसी हो कि पैर पूरी तरह जमीन पर टिके रहें।
सुरक्षित स्थान और स्थिर सतह पर ही अभ्यास करें।
ये सावधानियां चोट और असंतुलन से बचाव के लिए जरूरी हैं।
कुर्सी योग बढ़ती उम्र में जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों की कमजोरी और संतुलन की समस्याओं को दूर करने का सरल, सुरक्षित और असरदार तरीका है। नियमित अभ्यास से शारीरिक क्षमता बढ़ती है, मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है और बुजुर्ग स्वस्थ, सक्रिय और प्रसन्न जीवन जी सकते हैं।
