कालाष्टमी को काला अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है और यह हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव के रौद्र स्वरूप कालभैरव की पूजा करने से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। भक्त इस दिन विशेष रूप से रात्रि पूजा और भैरव स्तुति का पाठ करते हैं, जिससे उन्हें आध्यात्मिक शांति और संरक्षण की अनुभूति होती है।
इस दिन के पंचांग अनुसार सूर्योदय सुबह 6 बजकर 1 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 44 मिनट पर रहेगा। अष्टमी तिथि रात 11 बजकर 15 मिनट तक प्रभावी रहेगी, जिसके बाद नवमी तिथि प्रारंभ होगी। हालांकि उदयातिथि के आधार पर पूरे दिन अष्टमी का ही मान रहेगा, जिससे दिनभर पूजा और व्रत का विशेष महत्व बना रहेगा। नक्षत्र की बात करें तो पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र सुबह 11 बजकर 8 मिनट तक रहेगा, इसके पश्चात उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का आरंभ होगा। शिव योग शाम 6 बजकर 31 मिनट तक रहेगा, जो पूजा के लिए शुभ संकेत देता है।
शुभ मुहूर्तों की दृष्टि से यह दिन अत्यंत अनुकूल माना जा रहा है। ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 4 बजकर 31 मिनट से 5 बजकर 16 मिनट तक रहेगा, जो साधना और ध्यान के लिए श्रेष्ठ समय है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा, जबकि विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। इसके अतिरिक्त गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 43 मिनट से 7 बजकर 5 मिनट तक रहेगा, जिसे संध्या पूजा के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। अमृत काल सुबह 6 बजकर 8 मिनट से 7 बजकर 54 मिनट तक रहेगा, जो शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए उपयुक्त है।
वहीं, इस दिन कुछ अशुभ समय का ध्यान रखना भी आवश्यक है। राहुकाल सुबह 10 बजकर 47 मिनट से दोपहर 12 बजकर 23 मिनट तक रहेगा, जिसमें शुभ कार्यों से बचना चाहिए। यमगण्ड दोपहर 3 बजकर 33 मिनट से शाम 5 बजकर 9 मिनट तक रहेगा, जबकि गुलिक काल सुबह 7 बजकर 37 मिनट से 9 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। दुर्मुहूर्त सुबह 8 बजकर 34 मिनट से 9 बजकर 25 मिनट और दोपहर 12 बजकर 48 मिनट से 1 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। इसके साथ ही वर्ज्य समय रात 8 बजकर 12 मिनट से 9 बजकर 56 मिनट तक प्रभावी रहेगा, जिसे किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के लिए टालना उचित माना जाता है।
