जेल प्रहरी पवन शर्मा ने सहायक जेल अधीक्षक नीरज यादव पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि केंद्रीय जेल में बंद कैदियों से विभिन्न सुविधाओं के नाम पर अवैध वसूली की जाती है उन्होंने आरोप लगाया कि रुपए न देने पर कैदियों को प्रताड़ित भी किया जाता है जिससे जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं
प्रहरी के मुताबिक जेल के अंदर प्रतिबंधित गतिविधियां भी पैसों के बल पर संचालित हो रही हैं उनका आरोप है कि कैदियों को रुपए लेकर गांजा और अन्य नशीले पदार्थ उपलब्ध कराए जाते हैं इतना ही नहीं बैरक बदलवाने के नाम पर कैदियों से 50 हजार रुपए तक वसूले जाते हैं वहीं फोन पर बात कराने के लिए 2 मिनट के 500 रुपए तक लिए जाने का भी आरोप लगाया गया है इसके अलावा कैदियों की मांग के अनुसार अन्य सामान भी पैसे लेकर उपलब्ध कराया जाता है
इन गंभीर आरोपों के सामने आने के बाद जेल प्रशासन हरकत में आया लेकिन कार्रवाई का रुख कुछ अलग ही नजर आया जेल अधीक्षक विदित सिरवैया ने आरोप लगाने वाले प्रहरी पवन शर्मा को ही निलंबित कर दिया बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई झूठे और निराधार आरोप लगाने के आधार पर की गई है
वहीं इस पूरे मामले में सहायक जेल अधीक्षक नीरज यादव पर लगे आरोपों को लेकर अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है हालांकि इस घटनाक्रम ने जेल प्रशासन की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब पहले भी प्रदेश की जेलों में अवैध गतिविधियों और भ्रष्टाचार को लेकर चर्चाएं होती रही हैं ऐसे में ग्वालियर केंद्रीय जेल का यह मामला न केवल प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है बल्कि जेल सुधार व्यवस्था पर भी बहस को तेज कर सकता है
फिलहाल इस पूरे प्रकरण में आगे क्या जांच होती है और सच्चाई क्या निकलकर सामने आती है इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं लेकिन इतना जरूर है कि इन आरोपों ने जेल व्यवस्था की छवि पर एक बार फिर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है
